मंगलवारीय दैनिक वैदिक हवन-संध्या-स्वाध्याय
श्रीमती विद्यावती वैदिक ट्रस्ट
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मंगलवारीय दैनिक वैदिक हवन-संध्या-स्वाध्याय
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श्रीमती विद्यावती वैदिक ट्रस्ट
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साहित्य संगम संस्थान - मुख्य मंच
नारी नारायणी / शक्ति महोत्सव
विषय - नारी नारायणी के विविध रूप
विधा - गद्य (लघुलेख / लघु निबंध / पत्र / डायरी आदि)
पर्व - विजयादशमी विशेष
विषय प्रवर्तक - शिव संकल्प
विषय प्रवर्तन
🙏 या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः 🙏
सुप्रभात, शक्ति साधकों!
भगवान राम रावण पर विजय पाने के लिए संघर्षरत हैं, अर्थात् शक्ति-शांति-सामर्थ्य की विजय का दिन नजदीक है। और शक्ति कहाँ है? नारी में।
इसीलिए आज का विषय है - नारी नारायणी के विविध रूप
एक ही नारी, कितने रूप धरती है, देखिए -
*1. माँ - ममत्व का रूप -* जो नौ महीने कोख में रखती है, फिर जीवन भर आँचल में। जिसके बिना घर, घर नहीं।
*2. बेटी - जिज्ञासा का रूप -* जो आँगन में किलकारी बनकर आती है, सवाल पूछती है, सपने देखती है।
*3. शिक्षिका - ज्ञान का रूप -* जो क से ककहरा सिखाती है, जो पहली गुरु है। सावित्रीबाई फुले से लेकर आज की हर मैडम तक।
*4. योद्धा - साहस का रूप -* रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, झलकारी बाई - तलवार उठाए, घोड़े पर सवार।
*5. भारत माता - देशभक्ति का रूप -* तिरंगे की साड़ी में, हाथ में ध्वज लिए, हम सबकी माँ।
*6. देवी दुर्गा - शक्ति का रूप -* अष्टभुजा, सिंहवाहिनी, जो रक्षा करती है, संहार भी करती है।
आज की विधा - गद्य (मुक्त गद्य नहीं, वैचारिक गद्य)
आपको आज कविता नहीं, गद्य में लिखना है। चार विकल्प हैं, किसी एक को चुनिए -
*क) लघुलेख -* 150-200 शब्दों में किसी एक रूप पर केंद्रित लेख। जैसे - "मेरी माँ मेरा पहला विद्यालय"
*ख) लघु निबंध -* 300 शब्दों में - "आधुनिक युग में नारी के बदलते विविध रूप" - प्रस्तावना, विषय विस्तार, उपसंहार।
*ग) पत्र -* सबसे मार्मिक विधा। "अपनी बेटी के नाम पत्र - तू दुर्गा बनना" या "भारत माता के नाम पत्र" या "अपनी माँ के नाम एक पत्र जो कभी लिखा नहीं।"
*घ) डायरी -* आज विजयादशमी है, आज के दिन की डायरी लिखिए - "आज मैंने अपनी जीवन की किस दुर्गा को देखा, किस भारत माता को प्रणाम किया।"
लिखते समय विजयादशमी को कैसे जोड़ें?
याद कीजिए - विजयादशमी केवल रावण दहन नहीं, हमारे भीतर के उन विचारों का दहन है जो नारी को अबला समझते हैं। आज के दिन संकल्प लीजिए - हम नारी को केवल पूजेंगे नहीं, उसके विविध रूपों को समझेंगे, सम्मान देंगे।
कलम उठाइए, और गद्य में उस नारी की कहानी लिखिए जो आपके घर में, आपके आस-पास, आपके भीतर शक्ति बनकर रहती है।
*शुरुआत ऐसे कर सकते हैं -*
प्रिय माँ, विजयादशमी के दिन..."
"आज सुबह जब मैंने अपनी बेटी को स्कूल जाते देखा तो लगा...""डायरी - 13 अक्टूबर 2026 - आज विजयादशमी पर मैंने जाना कि..."
आपकी लेखनी से नारी के विविध रूपों की आरती की प्रतीक्षा में -
नारी तू नारायणी, शक्ति को नमन!