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“ब्राह्मण भी छुआछूत के शिकार! गांव में प्रवेश वर्जित,मारते हैं ढेला #Mahapatra #MahaBrahmin #Brahmin

Arun Sathi Podcast

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“ब्राह्मण भी छुआछूत के शिकार! गांव में प्रवेश वर्जित,मारते हैं ढेला #Mahapatra #MahaBrahmin #Brahmin

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ब्राह्मण भी छुआछूत के शिकार! गांव में प्रवेश वर्जित, लौटते समय मारते हैं ढेला | शेखपुरा भेदभाव और छुआछूत को समाज की बड़ी बुराई माना जाता है। आमतौर पर छुआछूत की चर्चा होते ही समाज के वंचित वर्गों की बात सामने आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्राह्मण समाज का एक वर्ग भी लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का सामना करता रहा है? शेखपुरा के मालदह इलाके से सामने आई यह कहानी महापात्र, महा ब्राह्मण अथवा तिवारी कहे जाने वाले ब्राह्मणों से जुड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ब्राह्मण समाज के भीतर भी अलग-अलग धार्मिक कर्मकांडों के आधार पर खेमे रहे हैं—कोई देव पूजा कराता है, कोई श्राद्ध कर्म और कोई ज्योतिष-पंचांग का काम करता है। इसी सामाजिक बंटवारे के कारण महापात्र या महा ब्राह्मणों को कई जगह भेदभाव का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, गांव के बाहर ही श्राद्ध कर्म कराया जाता है और उनके साथ बैठकर भोजन करने से भी लोग परहेज करते हैं। कुछ गांवों में तो लौटते समय ढेला मारकर भगाने जैसी परंपरा की भी बात सामने आई है। इस वीडियो में सुनिए मालदह के प्रमोद तिवारी, राकेश तिवारी, ज्योतिष पाठक और दीपक तिवारी की जुबानी इस सामाजिक परंपरा की कहानी। साथ ही जानिए वह व्यवस्था, जिसमें महापात्रों के बीच गांव और क्षेत्र तक बंटे हुए हैं और बताया जाता है कि इन क्षेत्रों का दो सौ साल से अधिक पुराना रिकॉर्ड मौजूद है। क्या यह परंपरा अब बदल रही है? क्या ब्राह्मण समाज के भीतर भी छुआछूत मौजूद है? और इसके पीछे धार्मिक मान्यता है या सामाजिक भेदभाव? पूरी कहानी जानने के लिए वीडियो अंत तक जरूर देखें। #Sheikhpura #Bihar #Mahapatra #MahaBrahmin #Brahmin #छुआछूत #भेदभाव #महापात्र #महाब्राह्मण #ब्राह्मण #सामाजिकभेदभाव #शेखपुरा #बिहार #जातीयभेदभाव #मगध #श्राद्धकर्म