बारिश का आनंद लेते हुए, सिद्ध पीठ कुप्पाघाट भागलपुर में, घर बैठे सत्संग सुनें। जय गुरु महाराज।
Suman bhakti marg
0:00 / 0:00
बारिश का आनंद लेते हुए, सिद्ध पीठ कुप्पाघाट भागलपुर में, घर बैठे सत्संग सुनें। जय गुरु महाराज।
1 591 просмотр · Трансляция закончилась 1 день назад
Suman bhakti marg
3,48 тыс. подписчиков
1 591 просмотр · Трансляция закончилась 1 день назад
हम देखते हैं, एक सरोवर है। उस सरोवर में समय पाकर सरसिज उत्पन्न होते हैं। वह सरसिज अपने सौरभ से संसार को सुरभित करता है। किंतु उसी कमल-नाल के निकट में रहने वाले मेढ़क को उसकी गंध का पता नहीं रहता। कमल की सुगंध को लेने के लिए, उसके पराग का पान करने के लिए भौंरा इतना अनुराग रखता है कि वह कहाँ-कहाँ चला जाता है; लेकिन उस कमल-नाल के निकट रहने वाला जो दादुर है, वह उसकी सुगंध से वंचित है। जबकि नास्तिक देश रूस में भी गुरु महाराज का ज्ञान घुस गया तो और क्या कहा जाय? कहाँ नार्वे और कहाँ जापान, वहाँ के लोग भी गुरु महाराज के दर्शन के लिए हैरान हैं। लेकिन यहाँ के लोग इस ज्ञान से अनभिज्ञ रहें तो इसका दोष किसको? दादुर सुगंध ग्रहण नहीं करे, इसमें कमल बेचारे का क्या दोष? कमल तो अपनी सुगंध बिखेरता ही रहता है। उसी तरह सदगुरु महाराज अपना ज्ञान बिखेर रहे हैं, लेनेवाला चाहिए।