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भिक्षुक कविता - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" | Bhikshuk Poem - Suryakant Tripathi Nirala #रचनाकार

रचनाकार _Radio

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भिक्षुक कविता - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" | Bhikshuk Poem - Suryakant Tripathi Nirala #रचनाकार

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श्रोताओं आज के इस पॉडकास्ट के द्वारा हम एक नए रचनाकार की कविता को लेकर आयें है जिसे शायद भारत का बच्चा-बच्चा जानता होगा | जी हां, हम बात कर रहे हैं कवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की | "निराला" की कविता भिक्षुक को सुनिये रचनाकार चैनल पर | इस कविता मे कवि निराला कहते हैं कि जब भिक्षुक आता दिखाई देता है, तो उसकी दयनीय दशा देखकर हृदय के टुकड़े होने लगते है। वह स्वयं अपनी भी करुणाजनक स्थिति से सभी को हार्दिक वेदना से भर देता है। कविता में निराला उस उपेक्षित वर्ग को अपनी समस्त करुणा समर्पित करते हैं जिन्हें समाज व्यक्ति मानने की भी इच्छा नहीं रखता। भिक्षुक इतना कमजोर है कि उसका पेट और पीठ मिलकर एक हो गए हैं। मुठ्ठी भर दानों को पाने के लिए वह फटी-पुरानी झोली फैलाता है। आशा है आपको यह काव्य पाठ पसंद आएगा | रचनाकार से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद ||| #रचनाकार #poetry #hindikavita