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क्या आपकी भक्ति शास्त्र के अनुसार है जानिए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग से

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क्या आपकी भक्ति शास्त्र के अनुसार है जानिए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग से

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क्या आपकी भक्ति शास्त्र के अनुसार है जानिए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग से क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार 'अधूरी भक्ति' और 'पूर्ण परमात्मा' की भक्ति में क्या अंतर है? संत रामपाल जी महाराज के इस सत्संग में जानें कि कैसे ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी की भक्ति और कबीर साहेब (पूर्ण ब्रह्म) की भक्ति का फल अलग-अलग है। जन्म-मरण के रोग से मुक्ति और सतलोक जाने का असली मार्ग जानने के लिए इस लेख/वीडियो को अंत तक देखें।" 1. श्रीमद्भगवद गीता का प्रमाण (अध्याय 16, श्लोक 23) संत जी बताते हैं कि गीता में स्पष्ट लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा के अनुसार मनमाना आचरण (भक्ति) करता है, उसे न तो सुख मिलता है, न सिद्धि और न ही परम गति (मोक्ष) प्राप्त होती है। इसे ही 'अधूरी भक्ति' कहा गया है। 2. तत्वदर्शी संत की पहचान (गीता अध्याय 4, श्लोक 34) शास्त्रों के अनुसार, केवल एक तत्वदर्शी संत ही उस पूर्ण परमात्मा के वास्तविक ज्ञान और गुप्त मंत्रों (नाम दीक्षा) के बारे में बता सकता है। संत रामपाल जी महाराज दावा करते हैं कि वे वही तत्वदर्शी संत हैं क्योंकि वे सभी धर्मों के शास्त्रों से प्रमाणित ज्ञान दे रहे हैं। 3. 'ॐ-तत्-सत्' का वास्तविक अर्थ (गीता अध्याय 17, श्लोक 23) अधूरी भक्ति में केवल 'ॐ' या अन्य नामों का जाप होता है, जबकि संत जी बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा को पाने के लिए 'ॐ-तत्-सत्' (सांकेतिक मंत्र) का तीन चरणों में जाप अनिवार्य है, जिसकी विधि केवल एक पूर्ण गुरु ही बता सकता है। 4. ब्रह्मा, विष्णु, शिव से ऊपर की शक्ति सत्संग के अनुसार, जहाँ दुनिया त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की भक्ति तक सीमित है, वहीं तत्वदर्शी संत बताते हैं कि ये तीनों 'काल ब्रह्म' के अधीन हैं। शास्त्र अनुसार भक्ति उस 'अक्षर पुरुष' और 'परम अक्षर पुरुष' (कबीर साहेब) की है जो जन्म-मरण से पूरी तरह मुक्त कर सकते हैं। Sant Rampal Ji Maharaj Satsang, Adhuri Bhakti vs Purn Parmatma, Supreme God Kabir, Spiritual Knowledge, Way of Living, Geeta Tera Gyan Amrit, Satlok Ashram, Real God, Moksh Ka Marg, Tatvdarshi Sant.