भाग -1 || संगीतमय सुंदरकांड || हारमोनियम पर बजाना सीखें || SUR SANGAM
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भाग -1 || संगीतमय सुंदरकांड || हारमोनियम पर बजाना सीखें || SUR SANGAM
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#HarmoniumCourse #LearnMusic #SurSangam ॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानघन।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ॥
किष्किन्धाकाण्ड
[ दोहा २९ ]
बलि बाँधत प्रभु बाढ़ेउ सो तनु बरनि न जाइ।
उभय घरी महँ दीन्हीं सात प्रदच्छिन धाइ ॥
अंगद कहइ जाउँ मैं पारा ।
जियँ संसय कछु फिरती बारा ॥
जामवंत कह तुम्ह सब लायक ।
पठइअ किमि सबही कर नायक ॥
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना ।
का चुप साधि रहेहु बलवाना ॥
पवन तनय बल पवन समाना ।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना ॥
कवन सो काज कठिन जग माहीं ।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं ॥
राम काज लगि तव अवतारा ।
सुनतहिं भयउ पर्बताकारा ॥
कनक बरन तन तेज बिराजा।
मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा ॥
सिंहनाद करि बारहिं बारा ।
लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा ॥
सहित सहाय रावनहि मारी।
आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥
जामवंत मैं पूँछउँ तोही।
उचित सिखावनु दीजहु मोही ॥
एतना करहु तात तुम्ह जाई ।
सीतहि देखि कहहु सुधि आई ॥
तब निज भुज बल राजिवनैना ।
कौतुक लागि संग कपि सेना ॥
छं० – कपि सेन संग सँघारि निसिचर
रामु सीतहि आनिहैं।
त्रैलोक पावन सुजसु सुर मुनि
नारदादि बखानिहैं ॥
जो सुनत गावत कहत समुझत
परम पद नर पावई ।
रघुबीर पद पाथोज मधुकर
दास तुलसी गावई ॥
[ दोहा ३० (क) ]
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि ।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि ॥
[ सोरठा ३० (ख) ]
नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक।
सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक ।।