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चेतक — महाराणा प्रताप का अमर वीर | Chetak | Cinematic Deshbhakti Song | Maharana Pratap

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चेतक — महाराणा प्रताप का अमर वीर | Chetak | Cinematic Deshbhakti Song | Maharana Pratap

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महाराणा प्रताप और उनके वीर अश्व चेतक की अद्भुत स्वामिभक्ति, साहस और बलिदान को समर्पित यह भावपूर्ण सिनेमाई गीत है। रणभूमि की गर्जना, अरावली की धरती, महाराणा प्रताप की वीरता और चेतक की अदम्य निष्ठा—यह गीत उस अमर गाथा को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करता है। “प्रताप के संग याद रहेगा, चेतक तेरा अमर नाम।” 🐎⚔️🇮🇳 यदि गीत आपको पसंद आए तो Like, Share और Subscribe अवश्य करें। 🇮🇳 जय जवान, जय किसान लाल बहादुर शास्त्री जी को समर्पित [प्रस्तावना — धीमी बाँसुरी और शहनाई] माटी की खुशबू में जिसने, भारत का सम्मान जिया, छोटे कद में ऊँचा होकर, राष्ट्रधर्म का मान जिया। नहीं महलों की चाहत थी, नहीं यश का अभिमान, सादा जीवन, ऊँचे विचार— वह भारत की पहचान। --- [मुखड़ा] जय जवान, जय किसान, गूँजे भारत का जयगान। देश के प्रहरी, अन्नदाता, दोनों पर है देश कुर्बान। जय जवान, जय किसान, शास्त्री जी का अमर संदेश। त्याग, तपस्या, सत्य, समर्पण— इनसे ऊँचा भारत देश। --- [अंतरा 1 — भावपूर्ण] गंगा किनारे जन्मा बालक, बनकर देश का लाल हुआ, सत्य अहिंसा की राहों पर, भारत का रखवाला हुआ। सत्ता आई, सत्ता बदली, पर मन उसका नहीं बदला, पद से ऊँचा राष्ट्र रहा था, स्वार्थ का दीप कभी न जला। जनता के दुख को अपना समझा, जनसेवा को धर्म बनाया, अपने जीवन की हर साँस को, भारत माँ पर वार चढ़ाया। --- [मुखड़ा] जय जवान, जय किसान, गूँजे भारत का जयगान। देश के प्रहरी, अन्नदाता, दोनों पर है देश कुर्बान। --- [अंतरा 2 — सैनिकों के लिए] सीमा पर जब संकट आया, वीरों ने ललकार भरी, माँ भारती की रक्षा खातिर, हर छाती ने हुंकार भरी। शास्त्री बोले—डरो न भारत, वीर तुम्हारे साथ खड़े, माटी माँ की आन बचाने, सीमा पर संकल्प अड़े। तलवारों से अधिक बड़ी थी, उनके मन की दृढ़ता महान, वीर जवानों के चरणों में, नतमस्तक हिंदुस्तान। --- [अंतरा 3 — किसान के लिए] सूखे खेतों में भी जिसने, आशा के बीज बोए थे, धूप सहे, बरसात सहे, फिर भी हल को थामे थे। जिसके श्रम से अन्न उगता, जिससे घर में दीप जले, उस किसान के माथे का श्रम, भारत का गौरव बनकर खिले। खेत और सीमा दोनों मिलकर, भारत की पहचान बने, एक लड़े तो देश सुरक्षित, एक उगाए तो प्राण पले। --- [सेतु — संगीत धीरे-धीरे ऊँचा होता है] न धन माँगा, न मान माँगा, केवल भारत का कल माँगा, अपने हिस्से का सुख त्यागा, देश का उज्ज्वल पल माँगा। जब इतिहास लिखेगा भारत, नाम तुम्हारा आएगा, सत्य, सरलता, त्याग और सेवा— हर युग तुमको गाएगा। --- [अंतरा 4 — भावनात्मक चरम] आज भी जब तिरंगा लहराए, तेरी याद जगाती है, भारत माँ की पावन धरती, तेरी गाथा गाती है। नन्हा-सा था कद तुम्हारा, पर संकल्प हिमालय था, भारत के हर वीर हृदय में, तुम्हारा ही उजियारा था। शास्त्री जी! हे राष्ट्रपुरुष, तुमको शत-शत नमन हमारा, जब तक सूरज-चाँद रहेगा, अमर रहेगा नाम तुम्हारा। --- [महान समापन — कोरस] जय जवान! जय किसान! जय भारत! जय हिंदुस्तान! माटी का मान रहे ऊँचा, सीमा का सम्मान रहे, किसान हँसे, जवान हँसे, भारत सदा महान रहे। जय जवान, जय किसान, गूँजे भारत का जयगान। लाल बहादुर शास्त्री जी को, शत-शत नमन, शत-शत नमन! भारत माता की जय! 🇮🇳