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रानी चेलना की कहानी।Rani Chelna Story।आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी।राजा श्रेणिक।Raja Shrenik

Purnmati Mataji

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रानी चेलना की कहानी।Rani Chelna Story।आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी।राजा श्रेणिक।Raja Shrenik

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🚩वैशाली के राजा चेटक की सात कन्याएँ थीं,जो रूप और गुणों में सर्वत्र प्रसिद्ध थीं।उनमें सबसे बड़ी प्रियकरिणी ‘त्रिशला’ थीं, जिसका विवाह कुण्डलपुर के राजा सिद्धार्थ से हुआ था “जिन्हें भगवान महावीर की माता होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था पाँचवी कन्या चेलना,छठी ज्येष्ठा और सातवीं चंदना थीं ” चेलना सम्यकदृष्टि थी और राजा श्रेणिक बौद्ध धर्मानुयायी थे अतः समय-समय पर धार्मिक विसंवाद होते रहते थे,राजा श्रेणिक रानी को बौद्धधर्मी बनाना चाहते थे और रानी चेलना राजा को जैनधर्मी बनाना चाहती थीं इसी सन्दर्भ में रानी चेलना ने बौद्ध भिक्षुओं को ढोंगी साबित करने हेतु अपमानित कर दिया और उनके रहने की झोपड़ी में आग लगवा दी,तब वो साधु उठकर भागे और राजा के पास शिकायत ले आये ” राजा ने भी प्रतिशोध चुकाने के लिए एक दिन वन में ध्यानस्त एक मुनिराज के ऊपर शिकारी कुत्ते छोड़े किन्तु मुनि के ध्यान के प्रभाव से वे कुत्ते शांत हो गए, तब राजा ने क्रोधित होकर मुनिराज के गले में एक मारा हुआ सर्प डाल दिया ” राजा श्रेणिक के उस समय परिणामों के संक्लेश विशेष से सांतवे नरक की तेतीस सागर प्रमाण आयु का बन्द हो गया अनन्तर तृतीय दिवस रात्रि में राजा श्रेणिक द्वारा रानी को सूचना मिलते ही वह उसी समय राजा के साथ उस स्थल पर आईं और मुनिराज का उपसर्ग निर्वाण किया ” उस समय मुनिराज ने दोनों को समान रूप से “सद्धर्मवृद्धिरस्तु” ऐसा आशीर्वाद दिया ” इस उपसर्ग सहिष्णुता और समभावना से राजा अत्यधिक प्रभावित हुए और सम्यग्दृष्टि बन गये कालान्तर में उन्हें भगवान महावीर के समवसरण में साक्षात् केवली प्रभु के दर्शन का लाभ मिला ” वे राजा श्रेणिक भगवान महावीर के समवसरण के मुख्य श्रोता थे और उन्होंने भगवान से साठ हजार प्रश्न किये। रानी चेलना की कहानी।Rani Chelna Story।आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी।राजा श्रेणिक।Raja Shrenik रानी चेलना की कहानी Rani Chelna story Rani chelna ki kahani