Перейти к содержимому

विधारा के फायदे - Benefits of Vriddhadaru (Vidhara) ऐलीफैण्ट क्रीपर (Elephant Creeper) के औषधीय गुण।

Gaon Gatha

0:00 / 0:00

विधारा के फायदे - Benefits of Vriddhadaru (Vidhara) ऐलीफैण्ट क्रीपर (Elephant Creeper) के औषधीय गुण।

22 569 просмотров · 4 г. назад
Gaon Gatha
53,3 тыс. подписчиков
22 569 просмотров · 4 г. назад
विधारा के बारे में कुछ सामान्य जानकारी: वानस्पतिक नाम: आर्गिरिया स्पेसिओसा, आर्गिरिया नर्वोसा फैमिलीः कॉन्वौल्वूलेसिया सामान्य नाम: #एलीफेंटक्रीपर वूली मॉर्निंग ग्लोरी, हवायन बेबी वुडरोज, सिल्की एलीफेंट ग्लोरी, वृद्धदारु, विधारा हिंदी नाम: समंदर-का-पट, #घावपत्ता #विधारा समुंदरसोखा संस्कृत नाम: समुद्रसोषा, अंतकोतरापुष्पी, वृद्धादारका या वृधा दारका, छगलानघिरी पौधे के इस्तेमाल किए जाने वाले हिस्सेः बीज, पत्तियां, जड़ें और फूल भौगोलिक वितरण: वृद्धदारु उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अच्छी तरह से पनपता व बढ़ता है। यह मूल रूप से भारत में पाया जाता है, लेकिन इसकी खेती मध्य और दक्षिण अमेरिका, पूर्वी एशिया और कैरिबियन क्षेत्रों में भी की जाती है। भारत में, वृद्धदारु आमतौर पर दक्षिण भारत के साथ-साथ ओडिसा, बिहार और असम जैसे राज्यों में पाया जाता है। विधारा (ऐलीफैण्ट क्रीपर) क्या है? विधारा (Vidhara Plant) एक औषधीय गुणों वाली सदाबहार लता है जो भारतीय उपमहाद्वीप में मुख्य रूप से पाई जाती है। भारत के जरिए ही विधारा हवाई, अफ्रीका, केरेबियन देशों में जाना जाता है। विधारा को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। विधारा को अधोगुडा, समन्दर का पाटा, घावपत्ता भी कहते हैं। विधारा के औषधीय गुण किसी भी प्रकार के घाव के मांस को जल्दी भर सकते हैं जिसकी वजह से इसे घाव बेल भी कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम अर्गीरिया नर्वोसा (Argyreia nervosa) और यह कान्वाल्वुलेसी (Convolvulaceae) कुल का पौधा है। इसे अंग्रेजी में ऐलीफैण्ट क्रीपर (Elephant Creeper) और वूली मार्निंग ग्लोरी (Wolly morning glory) कहते हैं। विधारा (ऐलीफैण्ट क्रीपर) का उपयोग किसलिए किया जाता है? विधारा (ऐलीफैण्ट क्रीपर) का इस्तेमाल निम्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए किया जा सकता है, जिसमें शामिल हैंः #जोड़ों का दर्द #गठिया #बवासीर #सूजन #डायबिटीज #खांसी #पेट में कीड़ों की समस्या #एनीमिया #मिर्गी #दर्द #दस्त मूत्र के प्रवाह को बढ़ाने में मदद करें गोनोरिया के उपचार के लिए त्वचा के रोगों के उपचार के लिए शारीरिक, मानसिक या सेक्स की कमजोरी दूर करने के लिए। ऐलीफैण्ट क्रीपर की जड़ का इस्तेमाल पेशाब के रोगों, त्वचा संबंधी रोगों, बुखार दूर करने, सूजन की समस्या के उपचार के लिए किया जा सकता है। विधारा की जड़ में एथेनॉलिक की मात्रा पाई जाती है। साथ ही, विधारा की जड़ के पाउडर में मेथेनॉल के गुण होते हैं, जो दर्द निवारक औषधि के तौर पर अपना प्रभाव दिखा सकते हैं। एक शोध के अनुसार इसकी जड़ का इस्तेमाल सेक्स की इच्छा बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, इसका प्रभाव महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों पर अधिक सफल देखा गया है। विधारा की पत्तियां इसकी पत्तियों का उपयोग बाहरी रूप से दाद, एक्जिमा, खुजली और अन्य त्वचा रोगों के इलाज के लिए भी किया जा सकता है। फोड़े और सूजन को ठीक करने के लिए पत्तियों का उपयोग आंतरिक रूप से भी किया जाता है। इसके लिए इसकी पत्तियों का काढ़ा पीना भी लाभकारी साबित हो सकता है। इसकी पत्तियां मुख्य रूप से वात का उपचार कर सकती हैं। इसका उपयोग उत्तेजक और रूबेफेशिएंट के रूप में भी किया जा सकता है। असम और बिहार के साथ, अन्य राज्यों में विधारा की पत्तियों को सब्जी के रूप में भी खाया जाता है। विधारा के बीज ऐलीफैण्ट क्रीपर के बीज में ह्यग्रोफिला ऑरिकुल्लाटा (Hygrophila auriculata) के जैसे गुण पाए जा सकते हैं। जिसका इस्तेमाल शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में किया जा सकता है। इसके बीज का अर्क जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, एंटीप्रोटोजोअल, एंटीवायरल और एंटीकैंसर के गुणों से भरपूर होता है। ऐलीफैण्ट क्रीपर में निम्न औषधीय गुण पाए जा सकते हैंः #नॉट्रोपिक #कामोत्तेजक #इम्युनोमोडायलेटरी #हेपेटोप्रोटेक्टिव #एंटीऑक्सिडेंट #एंटीइंफ्लेमेटरी #एंटीहाइपरग्लिसेमिक #एंटीडियरेहियल #एंटीकोर्सोबियल #एंटीवायरल #नेमाटाइडल #एंटीकुलर #एंटीकॉन्वेलसेंट #एनाल्जेसिक