Shri Yamunaji ke 41 Pad 29-32, શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ 29-32, श्री यमुनाजी के ४१ पद 25-28,
SUR SAGAR
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Shri Yamunaji ke 41 Pad 29-32, - શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ, - पुष्टिमार्ग कीर्तन,Haveli Sangeet, Kirtans, Bhajans, Shotras, Mantras, Pushtimarg Kirtan, Ashtachap, Bhagwati Prasad Ghandarva, Pushtimarg, Pushtimargiye Sangeet, SUR SAGAR, KIRTANKAR: Pt. BHAGWATI PRASAD
Kirtans by: Bhagwati Prasad
00:00 पद 29 - रास रस सागर श्रीयमुने जु जानि
6:06 पद 30 - भक्त प्रतिपाल जंजाल टारें
11:52 पद 31 - श्रीयमुनाजी को नाम ले सोई सुहागी
16:44 पद 32 - कौनपे जात श्रीयमुने जु बरनी
पद संख्या 29
रास रस सागर श्री यमुने जु जानी, बहत धारा तन प्रति छिन नौतन; राखत अपने उरमे जु ठानी.
भक्त को सहे भार, देत जु प्राण आधार, अतिही बोलत मधुर मधुर बानी;
'श्री विट्ठल' गिरिधरन वर बस किये, कौन पे जात महिमा बखानी.
पद संख्या 30
भक्त प्रतिपाल, जंजाल टारे, अपने रस रंग मे, संग राखत सदा;
सर्वदा जोइ श्री यमुने नाम उच्चारे.
इनकी कृपा अब कहां लग बरनिये, जैसे राखत जननी पुत्र बारे;
'श्री विट्ठल ' गिरिधरन संग विहरत, भक्तों को एक छीन ना बिसारे.
पदसंख्या 31
कोन पें जात श्री यमुने जु बरनी, सबही को मन मोहत मोहन; सो पियाको मन हे जु हरनी.
इन बिना एक छिन, रहत नही जीवन धन, ब्रजचंद मन आनंद करनी;
'श्रीविट्ठल' गिरिधरन संग आय, भक्त के हेत अवतार धरनी.
पद संख्या 32
श्री यमुनाजीको नाम ले सोई सुहागी, इनके स्वरूपको सदा चिंतन करत; कल न परत, जाय लेह लागी.
पुष्टि -मारग मरम, अतिहि दुर्लभ, करम छान्ड सगरे, परम प्रेम पागी;
'श्री विट्ठल' गिरिधरन, ऐसी निधि, भक्तकों देत है बिना मागी.