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अब सुप्रीम कोर्ट से भी उम्मीद नहीं? | कपिल सिब्बल का बड़ा बयान | जंतर-मंतर प्रोटेस्ट

Judgement Law commonsense

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अब सुप्रीम कोर्ट से भी उम्मीद नहीं? | कपिल सिब्बल का बड़ा बयान | जंतर-मंतर प्रोटेस्ट

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10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट होना था — CJP और दूसरे संगठनों का, जो वोटर लिस्ट के SIR में कथित गड़बड़ियों ("वोट चोरी") को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रोटेस्ट का ऐलान कई दिन पहले से था। लेकिन उस दिन दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके में धारा 163 BNSS (पुरानी धारा 144) लगा दी — मेट्रो स्टेशन बंद, ट्रेनें रद्द, बैरिकेड और बड़े पैमाने पर हिरासत। इसी पर वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखे सवाल उठाए। उनका कहना है कि धारा 163 तब लगाई जाती है जब हिंसा और जान-माल का खतरा हो — लेकिन एक पहले से घोषित शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट से खतरा आख़िर किसको था? सिब्बल के मुताबिक़ जो लोग जंतर-मंतर पहुँचे भी नहीं थे, उन्हें ट्रेन और फ्लाइट तक से हिरासत में ले लिया गया, कई को परिवार को बताए बिना "undisclosed destination" ले जाया गया, और सुप्रीम कोर्ट जा रहे वकीलों तक की गाड़ी रास्ते में रोकी गई। सिब्बल ने ये भी कहा कि बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाकर अब वो थक चुके हैं और उन्हें राहत की ज़्यादा उम्मीद नहीं रही — लेकिन वकील होने के नाते बेइंसाफी के खिलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी। इस वीडियो में आसान भाषा में समझिए — 👉 धारा 144 / 163 BNSS असल में किसलिए लगाई जाती है, और यहाँ उसका इस्तेमाल सही था या नहीं 👉 जंतर-मंतर पहुँचने से पहले ही ट्रेन-फ्लाइट से हिरासत — कानून इसकी इजाज़त देता है क्या? 👉 "undisclosed destination" और परिवार को न बताना — आपके मौलिक अधिकार इस पर क्या कहते हैं 👉 वकीलों को रोकने वाली घटना और FIR की अर्ज़ी का क्या हुआ 👉 इस पूरे मामले का "वोट चोरी" और SIR से क्या कनेक्शन है ये है JLC। कानून, आपकी भाषा में। मैं हूँ Samit। 👉 अगर इस वीडियो से आपको कानून समझने में मदद मिली हो, तो Like करें, Share करें और JLC को Subscribe करें। Disclaimer: इस वीडियो में दिखाई गई बातें कपिल सिब्बल द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे गए विचार और आरोप हैं — ये JLC के अपने निष्कर्ष या किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था के ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं हैं। "वोट चोरी" / SIR से जुड़े दावे कपिल सिब्बल के हैं; चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है और SIR प्रक्रिया को नियमों के अनुसार बताता है। संबंधित विषय न्यायालय में विचाराधीन (sub-judice) हो सकते हैं। इस वीडियो का उद्देश्य किसी का अपमान या किसी न्यायालय की अवमानना करना नहीं है। दर्शकों से अनुरोध है कि वे तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और अपनी राय ख़ुद बनाएं। #VoteChori #KapilSibal #JantarMantar Connect with us: 🏛️ Website: www.lawkhabar.co.in 📸 Instagram: www.instagram.com/jlccourtroom/ 📘 Facebook: www.facebook.com/samit.chakraborty.39545/ **Disclaimer**: All content is intended for informational and educational purposes only and does not constitute legal advice. Please consult a qualified attorney for specific legal advice. Thank you for watching and supporting our channel! Don't forget to like, comment, and subscribe for more insightful content.