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सूरह अल-हिज्र | Surah Al-Hijr | 15 सूरह | शेख मिशारी रशीद अलाफ़ासी | दिल को छूने वाली आवाज़ Heart

Quran & Sunnah

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सूरह अल-हिज्र | Surah Al-Hijr | 15 सूरह | शेख मिशारी रशीद अलाफ़ासी | दिल को छूने वाली आवाज़ Heart

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सूरह अल-हिज्र (Surah Al-Hijr) - 15वां सूरह क़ारी: शेख मिशारी रशीद अलाफ़ासी (Sheikh Mishary Rashid Alafasy) ​सूरह के बारे में पूरी जानकारी: ​सूरह नंबर: 15 ​कहाँ नाजिल हुई: मक्का मुकर्रमा (मक्की सूरह) ​कुल आयतें: 99 ​कब और क्यों नाजिल हुई? (सूरह का इतिहास): ​सूरह अल-हिज्र मक्का के उस बहुत ही कठिन और मुश्किल दौर में नाजिल हुई थी जब मक्का के काफिर पैगंबर हज़रत मोहम्मद (صلی اللہ علیہ وسلم) के इस्लाम के संदेश का कड़ा विरोध कर रहे थे। उस वक्त मुसलमानों पर बहुत अत्याचार हो रहे थे। ऐसे नाजुक वक्त में अल्लाह ताला ने यह सूरह नाजिल करके अपने नबी और मुसलमानों को दिलासा और तसल्ली दी कि घबराने की जरूरत नहीं है, अल्लाह हर मोड़ पर तुम्हारे साथ है और हक की ही जीत होगी। ​सूरह में क्या-क्या बातें बताई गई हैं? ​कुरान की सुरक्षा का वादा: अल्लाह ताला ने खुद वादा किया है कि इस पाक कुरान को हमने ही उतारा है और कयामत तक हम ही इसकी हिफाजत करेंगे (आयत 9)। ​इब्लिस और आदम का किस्सा: हज़रत आदम (علیہ السلام) की पैदाइश, शैतान का घमंड और कैसे वह इंसान का दुश्मन बना, इसका पूरा वाकया बताया गया है ताकि लोग शैतान के बहकावे से बचें। ​पिछले नबियों की कहानियाँ: हज़रत इब्राहिम (علیہ السلام), हज़रत लूत (علیہ السلام) और कौम-ए-हिज्र के किस्से सुनाकर लोगों को सीख और नसीहत दी गई है। ​अल्लाह की दया और क्षमा: इसमें बताया गया है कि अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, इंसान को कभी निराश नहीं होना चाहिए और हमेशा अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए। ​यह तिलावत आपके दिल को बेहद सुकून और शांति देगी। इसे खुद भी सुनें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। #SurahAlHijr #Surah15 #QuranRecitation #MisharyRashidAlafasy #HeartTouchingRecitation #QuranInHindi #IslamicVideo #FullSurah