जो तुम खोज रहे हो, वह तुम खुद हो | Adhyatma Upanishad by Osho | Part 4/4
Osho Whole Life A - Z Playlist 🤠
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जो तुम खोज रहे हो, वह तुम खुद हो | Adhyatma Upanishad by Osho | Part 4/4
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परम सत्य हमारे इतने निकट है जैसे हमारी श्वास, लेकिन स्थूल आँखों से वह सूक्ष्म सत्य दिखाई नहीं देता। ओशो बता रहे हैं कि तुम ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हो, जिसे बाहर भटककर खोजने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• वायु और श्वास की तरह परम सत्य प्रतिपल हमारे निकट है।
• हमारी आँखें स्थूल हैं, इसलिए हम केवल स्थूल वस्तुओं को देख पाते हैं, सूक्ष्म को नहीं।
• तुम स्वयं प्रत्यक्ष ब्रह्म हो, बाहर की खोज व्यर्थ है।
• मन केवल शब्दों का संग्रह है, वास्तविक सत्य शब्दों के पार है।
Series: Adhyatma Upanishad | Episode: 1 | Part: 4/4
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