सतयुग के समय का है बिंदु सरोवर का इतिहास | Bindu Sarovar | Sidhapur Patan | Gujarat
Tilak
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सतयुग के समय का है बिंदु सरोवर का इतिहास | Bindu Sarovar | Sidhapur Patan | Gujarat
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जय श्री हरी नारायण !!! आप सभी का हमारे कार्यक्रम दर्शन में हार्दिक अभिनन्दन... भक्तों, हिन्दू धर्म में श्राद्ध का बहुत अधिक महत्त्व बताया गया है , ऐसा कहा जाता है कि यदि मृत व्यक्ति का श्राद्ध, श्रद्धा भाव व नियमो से नहीं किया गया तो उसकी मुक्ति नहीं हो पाती अर्थात व्यक्ति की आत्मा भटकती रहती है , और यदि किसी के पूर्वजो और पितरो की मुक्ति नहीं होती तो उसका दुष्परिणाम उसके वंशजो को भुगतना पड़ता है , इसीलिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करने की रीति है, यद्यपि पितृपक्ष में तो श्राद्ध केवल 16 दिन ही किये जाते हैं परन्तु भारत में 3 ऐसे स्थान हैं जहाँ वर्ष भर में कभी भी जाकर श्राद्ध करने से मृत व्यक्ति की मुक्ति हो जाती है, ये गया स्थान हैं , जिसमें प्रथम स्थान है कपाल गया -बद्रीनाथ में , द्वितय स्थान है - गर्भ गया या नाभि गया, ये सिद्धपुर अर्थात श्री स्थल के नाम से जाना जाता है जिसे बिंदु सरोवर भी कहते हैं, और तृतीय स्थान है पाद गया जो गया जी बिहार में है। इन् तीनो ही स्थानों पर श्राद्ध करने से मुक्ति मिल जाती है।
इन् तीनो स्थानों में एक स्थान बिंदु सरोवर पर केवल स्त्रियों का श्राद्ध होता है, यहाँ पर पुत्र अपनी माता का व् पति अपनी पत्नी का श्राद्ध करते हैं और उन्हें मुक्ति प्रदान कराने की प्रार्थना करते हैं।
इस दिव्य स्थान बिंदु सरोवर का इतिहास सतयुग के समय का है , कहा जाता है कि सृष्टि के आरम्भ में ब्रम्हा जी से मनु और शतरूपा की उत्पति हुयी , उन्ही श्री मनु और शतरूपा जी से 3 कन्याओ आकृति , देवहुति और प्रसूति का जन्म हुआ
इस दिव्य स्थान पर कई देवी देवताओ के मंदिर बने हैं, भगवान नारायण हरी विष्णु यहाँ कर्दम और देवहुति को दर्शन देने गरुड़ पर आये थे , इसलिए यहाँ श्री नारायण विष्णु का मंदिर भी है, तथा कर्दम ऋषि और माता देवहुति मंदिर भी बना हुआ है , इन्ही के साथ , कपिल भगवान का मंदिर , सोमेश्वर मंदिर , अन्नपूर्णा मंदिर , श्री हनुमान मंदिर , श्री गणेश मंदिर , कार्तिकेय मंदिर , तथा सरस्वती मंदिर बने हुए हैं , जहाँ श्रद्धालुजन दर्शन कर पुण्य फल की प्राप्ति करते हैं।
Disclaimer- यहाँ मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Chapters
0:00 – Episode की शुरुआत
1:22 – मंदिर के बारे मे
2:30 – मंदिर की पौराणिक कथा
5:00 - मंदिर परिवेश
5:45 – मंदिर कैसे पहुँचे
7:07 – Episode का अंत
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