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जिसे दास समझा गया, वही निकला स्वर्गों का सम्राट!

दो जीवन

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जिसे दास समझा गया, वही निकला स्वर्गों का सम्राट!

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दो जीवन
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लॉन्गगुओ की रक्षा के लिए ली चांगशेंग ने सम्राट-स्तर की सीमा तोड़कर चार सर्वोच्च शासकों को परास्त किया, लेकिन इस संघर्ष के बाद उसकी आत्मिक शक्ति बिखर गई और वह जियांगचेंग में जा पहुँचा। अपनी पहचान खो चुका ली चांगशेंग शियाओ परिवार का सेवक बनकर रहने लगा, जबकि उसका रिश्ता शियाओ लिंगलोंग से तय था। वर्षों बाद उसकी स्मृतियाँ लौटती हैं और उसके भीतर सोया हुआ परम देवता फिर जाग उठता है। जब शियाओ लिंगलोंग विवाह संबंध समाप्त करने की मांग करती है, तो ली चांगशेंग चुपचाप अपमान सहने के बजाय स्वयं यह रिश्ता तोड़ देता है। तभी सामने आता है एक और चौंकाने वाला सच—शियाओ परिवार न तो मानव सम्राट की तलवार के योग्य है, न ही ताइछिंग महल के रहस्यों को समझने के। अपनी असली पहचान वापस पाने के साथ ली चांगशेंग को अपने अतीत, पुराने शत्रुओं और उस रहस्य की तह तक पहुँचना होगा, जिसके कारण उसकी सर्वोच्च अस्थि उससे छीन ली गई थी।