Перейти к содержимому

क्या देख रहा गोचर मुहूर्त ! रचना -" लक्ष्य जयपुरिया " एल पी शर्मा, जयपुर - राज .

Lakshya Jaipuria L P Sharma

0:00 / 0:00

क्या देख रहा गोचर मुहूर्त ! रचना -" लक्ष्य जयपुरिया " एल पी शर्मा, जयपुर - राज .

42 просмотра · 7 дн. назад
Lakshya Jaipuria L P Sharma
83 подписчика
42 просмотра · 7 дн. назад
क्या देख रहा गोचर मुहूर्त ! [Verse 1] क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त बिन मुहूर्त दिन रात चले चले समय-चक्र बिन मुहूर्त देह जन्मता बिन मुहूर्त अरु नश्वर होता बिन मुहूर्त फिर जीवन के पथ में क्यों मन कल्पित भिन्न भिन्न मुहूर्त [Chorus] क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त [Verse 2] अनुमानित पंचाग घड़ी यम दरबार नहीं चलती ना फलित ज्योतिर्गणित सटीक शत प्रतिशत होती जो लिख दिया लेख विधाता ने अटल भोग कारक होता ना उसमें कोई संशोधन ना परिणाम इधर उधर होता [Chorus] क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त [Verse 3] वसिष्ठ विरंचित कुण्डली बहु गणना कर बहु योग ना आई युक्ति काम में राम संलग्न रहा दुख भोग शिव महाशक्ति रुद्र तक ना काट सके लेख लकीर ना घटा सके दक्ष यज्ञ में जलती सती की पीर [Bridge] राधा कान्हा संग रहा बिछोह योग बलवान राधा बेबस प्रेम में असहाय कृष्ण भगवान कैसी विडम्बना भाग्य की नल कोल्हु जुते लाचार पुत्र, हरिश्चन्द्र, तारा बिके काशी खुले बाजार [Chorus] क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त [Outro] नियति के चौबारों में बोलें शब्द से शब्द तेरे ज्यों गूंजे गुंबज में प्रति-ध्वनि वो भी गूंजेंगे सबरे जो देगा वही अंतरिक्ष तुझको वापस लौटायेगा प्रभु शरण जा, प्रबल कष्ट बिन वेदन के कट जायेगा बिन मुहूर्त दिन रात चले चले समय चक्र बिन मुहूर्त क्या देख रहा गोचर मुहूर्त विधि विधान गति बिन मुहूर्त लक्ष्य जयपुरिया ( एल पी शर्मा ) जयपुर - राज . Copyright Disclaimer लेखक - लक्ष्मी प्रसाद शर्मा “ लक्ष्य जयपुरिया “, प्रकाशन वर्ष,16 अक्टूबर 2026 , यह सामग्री मूल है कॉपीराइटेड है और अनुमति के बिना अनधिकृत उपयोग वर्जित है ! Laksh