हाडौती के किसान जुटे सरसों की बुवाई में खेतों में करने लगे पलेवा Live रिपोर्ट। खबरवाला NEWSWALA
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बारां में कमजोर मानसून का असर- खेतों में सरसों की तैयारी, पानी की कमी ने बदला किसानों का फसल प्लान
बांध-तालाब खाली, गेहूं और लहसुन का रकबा घटने की आशंका, खाद के लिए भी चक्कर काट रहे किसान
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बारां। खेत में पानी छोड़ा जा रहा है। जमीन बुवाई के लिए तैयार हो रही है। किसान बीज लेकर खड़े हैं, लेकिन उनके सामने सवाल है कि फसल कौन-सी बोई जाए, क्योंकि पानी ही कम है। हाड़ौती के बारां में कमजोर मानसून का असर अब रबी की बुवाई पर दिखाई देने लगा है।
मेलखेड़ी रोड के खेतों में किसान सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। किसान हेमराज और रामस्वरूप बताते हैं कि बारिश कम होने से बांधों और तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं है। ऐसे में गेहूं जैसी फसल की जगह सरसों की बुवाई करना मजबूरी बन सकता है। लहसुन की खेती का रकबा भी इस बार घटने की आशंका है।
सवाल सिर्फ फसल बदलने का नहीं है। सवाल उस पानी का है, जिसके भरोसे किसान पूरे सीजन की कमाई का हिसाब लगाता है। पानी कम हो तो खेती का फैसला भी आसमान और जलस्तर को देखकर करना पड़ता है।
कृषि विभाग ने तय किया बुवाई का लक्ष्य
कृषि विस्तार विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश विजय के मुताबिक, जिले में एक लाख हेक्टेयर में सरसों, डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं, 50 हजार हेक्टेयर में चना और 20 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई का लक्ष्य है।
खाद की किल्लत भी चिंता
एक तरफ खेत तैयार हैं, दूसरी तरफ खाद के लिए किसानों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। समय पर खाद नहीं मिला तो बुवाई प्रभावित होने की चिंता है। अब किसानों के सामने दो चुनौतियां हैं—पानी का इंतजाम और खाद की उपलब्धता। इस रबी सीजन में उनकी फसल का फैसला सिर्फ मेहनत नहीं, संसाधनों की उपलब्धता भी करेगी।