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श्री हरि की रास महिमा | जब कृष्ण नाम से मिटते हैं जीवन के तीनों ताप | उत्सव प्रकाश

उत्सव प्रकाश — रामभक्ति की जीवित परम्परा

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श्री हरि की रास महिमा | जब कृष्ण नाम से मिटते हैं जीवन के तीनों ताप | उत्सव प्रकाश

16 просмотров · 12 дн. назад
उत्सव प्रकाश — रामभक्ति की जीवित परम्परा
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जय श्रीहरि। जय श्रीकृष्ण। जय सियाराम। 🙏 क्या कभी ऐसा हुआ है कि सब कुछ होते हुए भी मन भीतर से खाली लगे? लोग आसपास हों, फिर भी मन अकेला महसूस करे? काम, चिंता, रिश्तों और जीवन की भागदौड़ के बीच मन को शांति न मिले? आज से लगभग सवा सौ वर्ष पहले रचे गए ‘उत्सव प्रकाश’ में श्री राम रतन शाह जी ने श्रीहरि की ऐसी महिमा का वर्णन किया, जो आज भी हमारे जीवन को छूती है। इस वीडियो में हम सुनेंगे— “श्री हरि की रास महिमा” मूल अवधी रचना के साथ उसका सरल हिंदी भावार्थ और आज के जीवन से उसका संबंध। इस रचना में श्रीकृष्ण के रूप, नाम-महिमा, रास, गुरु-कृपा और संतों की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन मिलता है। “मिटत ताप त्रय तास जासु नाम मुख से कहत...” श्रीहरि का नाम केवल एक शब्द नहीं—भक्त के लिए वह आश्रय है, स्मरण है और उस विश्वास का नाम है कि जीवन की कठिन घड़ी में हम अकेले नहीं हैं। श्री राम रतन शाह जी द्वारा 1885–1905 के मध्य रचित ‘उत्सव प्रकाश’ भारतीय हिन्दू उत्सवों से संबंधित चौपाई-गीत संग्रह है, जिसमें मूल रचनाओं के साथ भाषानुवाद और टिप्पणियाँ भी उपलब्ध हैं। आज की भागती हुई जिंदगी में शायद इस रचना का सबसे सुंदर संदेश यही है— “हे श्रीहरि... मेरे जीवन की सारी समस्याएँ तुरंत दूर हों, यह जरूरी नहीं। बस इतनी कृपा कर दीजिए कि समस्याओं के बीच मैं आपको भूलूँ नहीं।” अगर यह प्रस्तुति आपके हृदय को छुए तो वीडियो को Like करें, अपने विचार Comment में लिखें और इस भक्ति संदेश को अपने प्रियजनों के साथ Share करें। कमेंट में लिखें — “हे श्रीहरि, मेरे हृदय में निवास कीजिए।” 🙏 जय श्रीकृष्ण। जय श्रीहरि। जय सियाराम। #श्रीहरि #श्रीकृष्ण #कृष्णभक्ति #रासलीला #भक्तिभाव #उत्सवप्रकाश #श्रीरामरत्नशाह #अवधीसाहित्य #अवधीभाषा #रामभक्ति #कृष्णनाम #सनातनधर्म #भक्तिकथा #हिंदीभक्ति #गुरुमहिमा #संतमहिमा #कृष्णकथा #भजन #भारतीयसंस्कृति #सनातनसंस्कृति