Orchha जब नास्तिक collector को नहीं दिए ramraja ने darshan #ramraja temple orchha bundeli tarkas
Bundeli Tarkas
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Orchha जब नास्तिक collector को नहीं दिए ramraja ने darshan #ramraja temple orchha bundeli tarkas
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बुंदेलखंड की अयोध्या ओरछा में राजा के.रूप में विराजमान रामराजा सरकार की महिमा और चमत्कारों के अनेक किस्से हैं पर हम आपको जिन घटनाओं से रूबरू. करवा रहे हैं, वह महज चालीस पचास वर्ष पुरानी हैं। रामराजा मंदिर को जिस दिन से ओरछा राजवंश ने सरकार को सौंपा,
उसी दिन से मंदिर का प्रबंधक जिला कलेक्टर ही होता है। ओरछा रामराजा दरबार की यह घटना है सत्तर के दशक की जब एक कलेक्टर यहां मंदिर के प्रबंधक का पदभार. ग्रहण करने आया, यह डीएम इस हद तक नास्तिक था.कि कोई उसके सामने भगवान का नाम भी ले दे तो वह भड़क जाता था।.ओरछा से बिना रामराजा सरकार के दर्शन किए पदभार ग्रहण करके वापिस टीकमगढ़ जिला मुख्यालय चला गया। ओरछा में.मनाये जाने. वाले.विवाह. पंचमी पर्व.की.व्यवस्थाओं को लेकर ह़ोने वाली. बैठक.में भाग.लेने के लिए कलेक्टर को कुछ.दिन.बाद एक.बार.फिर ओरछा आना.पड़ा , इस बार.वह अकेले नहीं. थे, साथ में पत्नी भी.आईं. थीं।.कलेक्टर जितना नास्तिक था.पत्नी उतनी ही धर्मपरायण। बैठक के बाद डीएम से उनकी पत्नी ने आग्रह किया. कि.उन्हें रामराजा. सरकार के.दर्शन करवा दें। डीएम ने कर्मचारियों को आदेश दिया. कि.वे बाईजी को दर्शन करवा कर लाएं । पत्नी ने समझाया कि हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में लिखा हुआ है.कि.पति पत्नी दोनों एक साथ मिलकर धार्मिक कार्य करते.हैं तभी उसका पुण्य प्राप्त होता है, डीएम से पत्नी ने कहा कि भले ही आपकी आस्था भगवान. में.न.हो पर.मेरी खातिर आप दरबार. में मेरे. साथ. खड़े. हो जाएंगे तो मेरे लिए प्रभु के.दर्शन पुण्य फलदायी ह़ो जाएंगे। काफी जद्दोजहद के बाद कलेक्टर दरबार में जाने के लिए तैयार तो.हो गया पर.रामराजा के.दरबार में दर्शन के.दौरान. जो हुआ वह चौंकाने. वाला.था। डीएम की पत्नी को तो रामराजा.सरकार के दर्शन हो.रहे.थे पर उस नास्तिक कलेक्टर को रामजी की प्रतिमा दिखाई नहीं. दे रही थी। पुजारी ध्यान दास पाठक.से.कहकर प्रतिमा पर एक हजार. वाट का बल्ब लगाया गया, पर कलेक्टर को.रामराजा सरकार की.प्रतिमा के दर्शन फिर भी.नहीं हुए। जबकि,उनकी पत्नी बराबर कह रहीं.थीं कि उन्हें दर्शन हो रहे. हैं।.कलेक्टर को लक्ष्मण और सीता. जी के दर्शन तो हो.रहे थे, पर रामराजा सरकार की प्रतिमा दिखाई. नहीं दे रही थी। काफी प्रयास के.बाद भी.जब .दर्शन नहीं हुए तो कलेक्टर परिवार के साथ जिला. मुख्यालय टीकमगढ़ चला गया, पर उस रोज उसे रातभर नींद. नहीं आई, सुबह पति की.बेचैनी देखकर डीएम की धर्मपरायण पत्नी ने उसे समझाया कि भगवान तो भाव के.भूखे होते. हैं आप अपने मन.में प्रभु के प्रति.भक्ति का.भाव लाइए, रामराजा सरकार आपको जरूर दर्शन देंगे। चार.दिन. बाद ही ओरछा में श्रीराम. विवाह. महोत्सव था, कलेक्टर ने दूल्हा सरकार को.नई पोशाक सिलवाई, मंडप वाले रोज अपनी ओर से.राजभोग लगवाया तथा शाम की आरती में शामिल होने परिवार सहित दरबार. में पहुंच गया। आरती शुरू होने. से पहले कलेक्टर ने साष्टांग दंडवत कर अब तक उसने जो गलती की.थी, उसके लिए क्षमा प्रार्थना की।.घंटा घड़ियाल शंख ध्वनि के साथ आरती शुरू हुई। कलेक्टर की आंखों से आंसू बह रहे थे, रुंधे हुए गले से एक ही आवाज निकल रही थी, जय हो दूल्हा सरकार की जय रामराजा सरकार की। कलेक्टर ने आंसू पौंछते हुए अपनी पत्नी से कहा सिर पर.मौर रखे मेरे दूल्हा सरकार कितने सुंदर लग रहे हैं। इस तरह एक नास्तिक कलेक्टर. को रामराजा. सरकार. ने अपनी महिमा. से आस्तिक बना. दिया। यहां से तबादला हो जाने के.बाद भी यह कलेक्टर रामराजा के.दर्शन करने.ओरछा. आते.रहे। YouTube par subscribed kre bundeli tarkas and follow our Page बुंदेली तरकश
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