कुरुक्षेत्र का मध्य युद्ध: जब बाणों की वर्षा से कांप उठा रणक्षेत्र
Titla
0:00 / 0:00
कुरुक्षेत्र का मध्य युद्ध: जब बाणों की वर्षा से कांप उठा रणक्षेत्र
79 просмотров · 11 дней назад
Titla
31 подписчик
79 просмотров · 11 дней назад
कांप उठा रणक्षेत्र | Mahabharat War Phase 2
[Verse — युद्ध का मध्य भाग: कुरुक्षेत्र का तांडव]
चक्रव्यूह की उलझन,
अभिमन्यु का हुंकार।
धरती चीख रही थी,
छाया था हाहाकार।
कर्ण के बाणों की गड़गड़ाहट,
अर्जुन का प्रतिशोध।
खून से सनी इस माटी पर,
हर श्वास ले रही थी क्रोध!
[Chorus — रणबांकुरे]
कण-कण में है कोहराम मचा,
कौन मित्र और कौन यहाँ बचा?
रथ के पहिए धंस चुके हैं कीचड़ में,
धर्म फंसा है अपनों की भीड़ में।
गूंज रहा एक ही स्वर—
कर्म करो, मत देखो प्रहर!
जय केशव! जय माधव!
[Outro — युद्ध के बीच का सत्य]
ये कुरुक्षेत्र है…
यहाँ रिश्ते नहीं, सिर्फ कर्म बोलते हैं।
हर तीर एक सवाल है,
हर आहत एक इतिहास।
वीडियो डिस्क्रिप्शन (Video Description)
कुरुक्षेत्र के मैदान पर युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर है। चक्रव्यूह का चक्र, कर्ण और अर्जुन का आमना-सामना, और हर तरफ पसरा खूनी सन्नाटा—यह कविता आपको सीधे महाभारत के रणक्षेत्र के बीच में ले जाएगी। जानिए कैसे युद्ध के उस दौर में धर्म और कर्म की सबसे बड़ी परीक्षा हो रही थी।
Hashtags: #Mahabharat #Kurukshetra #Karna #Arjun #MahabharatWar #GeetaGyan #EpicBattle #HindiPoetry