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रेज़ांग ला 1962: 120 जवान, आख़िरी गोली तक | मेजर शैतान सिंह की सच्ची कहानी | Rezang La Battle

Curiosity Compass

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रेज़ांग ला 1962: 120 जवान, आख़िरी गोली तक | मेजर शैतान सिंह की सच्ची कहानी | Rezang La Battle

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Curiosity Compass
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18 नवंबर 1962, लद्दाख का रेज़ांग ला। करीब सोलह हज़ार फ़ुट की ऊँचाई, कड़ाके की ठंड, और 13 कुमाऊँ की चार्ली कंपनी के करीब 120 जवान। सामने कई गुना बड़ी दुश्मन फ़ौज, और पीछे से तोपों का कोई सहारा नहीं। ये कहानी है मेजर शैतान सिंह (परमवीर चक्र, मरणोपरांत) और उनके जवानों की, जिन्होंने आख़िरी गोली तक मोर्चा नहीं छोड़ा। तीन महीने बाद जब टीम वहाँ पहुँची, तो जवान अपनी-अपनी पोज़ीशन पर हथियार थामे मिले। ⏱️ Chapters 0:00 शुरुआत 0:26 पृष्ठभूमि: 1962 0:57 चार्ली कंपनी 1:21 मुश्किल हालात 1:52 अठारह नवंबर की सुबह 2:33 मेजर शैतान सिंह का साहस 3:38 तीन महीने बाद 4:15 सम्मान और विरासत इस वीडियो में: • चुशूल क्यों अहम था और रेज़ांग ला कहाँ है • तोपें मदद क्यों नहीं कर सकीं (पहाड़ी की आड़) • 18 नवंबर की सुबह की लड़ाई, पलटन दर पलटन • मेजर शैतान सिंह का आख़िरी आदेश • फ़रवरी 1963 की खोज, परमवीर चक्र और रेज़ांग ला की विरासत नोट: दुश्मन के नुकसान के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में अलग हैं, इसलिए वीडियो में सिर्फ़ "भारी नुकसान" कहा गया है। नक्शों पर हमले की दिशाएँ सांकेतिक हैं। स्रोत: Indian Army / Gallantry Awards (gallantryawards.gov.in), IDSA, Wikipedia (Battle of Rezang La, Shaitan Singh) व अन्य सार्वजनिक स्रोत। 📷 Credits: Wikimedia Commons (CC BY-SA / CC0 / Public Domain / GODL-India — लेखकों के नाम sources में दर्ज), US Army Map Service 1954 maps (Public Domain), Mixkit stock video & music (Mixkit Free License). नक्शे, टाइमलाइन व ग्राफ़िक्स: Curiosity Compass. अगर ये कहानी आपके दिल को छू गई, तो वीडियो को शेयर कीजिए और Curiosity Compass को सब्सक्राइब कीजिए 🔔 #RezangLa #MajorShaitanSingh #IndianArmy #ParamVirChakra #1962War #Ladakh #Chushul #KumaonRegiment #भारतीयसेना #वीरगाथा #HindiDocumentary #CuriosityCompass #IndiaChinaWar #TrueStory