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संधि घड़ी की रानी माँ | Sandhi Puja Bhajan 2026 | Jai Chamunde Durga Ashtami Navami Song

Unbox Bhakti

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संधि घड़ी की रानी माँ | Sandhi Puja Bhajan 2026 | Jai Chamunde Durga Ashtami Navami Song

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🪘 ढाक की थाप, शंख की गूँज और 108 दीपों की लौ — अष्टमी ढलती है, नवमी चलती है, और आती है संधि घड़ी! 🔱 इस पावन बेला में जय बोलिए माँ चामुंडा की, जिन्होंने चंड-मुंड का संहार किया। 🙏 "संधि घड़ी की रानी माँ" दुर्गा अष्टमी और महानवमी के मिलन पर होने वाली संधि पूजा का भक्ति भजन है। इसमें ढाक-शंख की ध्वनि, 108 कमल और 108 दीपों का अर्पण, माँ चामुंडा द्वारा चंड-मुंड के संहार की कथा और श्रीराम की अकाल बोधन कथा — 108 नीलकमल में एक कम पड़ने पर अपना नयन चढ़ाने का संकल्प — गाई गई है। लाल चुनरी, गुड़हल की माला और बेलपत्र की थाली के साथ माँ से विनती है कि संधि घड़ी में कोई खाली न जाए। Sandhi Ghadi Ki Rani Maa is a Hindi devotional bhajan for Sandhi Puja 2026, the sacred 48-minute junction of Durga Ashtami and Maha Navami during Sharad Navratri and Durga Puja. It celebrates Maa Chamunda, the form of Maa Durga who slew the demons Chanda and Munda, with dhak drums, conch shells, 108 lotuses and 108 diyas, and recalls Lord Rama's Akal Bodhan worship with 108 blue lotuses. Ideal for Durga Puja pandals, Navratri puja, jagran, mata ki chowki and bhajan sandhya. 🔱 संधि पूजा — भजन में क्या है: 1. अष्टमी-नवमी की संधि बेला — ढाक, शंख, झाँझ और धूप-जोत 2. चंड-मुंड का आक्रमण और माँ चामुंडा का प्रकट होना 3. 108 कमल, 108 दीप और माँ के 108 नाम 4. श्रीराम की अकाल बोधन कथा — 108 नीलकमल और नयन अर्पण का संकल्प 5. लाल चुनरी, गुड़हल माला, बेलपत्र — संधि घड़ी में मनोकामना LYRICS : [Intro] ढाक बजाओ, शंख बजाओ, संधि घड़ी है आई दीप जलाओ, कमल चढ़ाओ, आई चामुंडा माई [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 1] अष्टमी ढलती, नवमी चलती, पावन बेला आई धूप महकती, जोत दमकती, सबने अलख जगाई [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 2] चंड चढ़ा और मुंड बढ़ा, छल से पीछे आए तीजा नैन खुला जो माँ का, असुर सभी थर्राए [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 3] खप्पर हाथ, खड्ग है साथ, मुंडों की माला धारी चंड मुंड का शीश उतारा, चामुंडा बलिहारी [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 4] एक सौ आठ कमल खिलें, एक सौ आठ दीप जलें एक सौ आठ नाम तुम्हारे, गा-गा कर सब झूम चलें [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 5] नीलकमल से पूजे रघुवर, एक कमल कम पाया नयन चढ़ाने चले जो रघुवर, माँ ने विजय दिलाया [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Verse 6] लाल चुनरिया, गुड़हल माला, बेलपत्र की थाली संधि घड़ी में जो भी माँगे, जाए न कोई खाली [Chorus] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ [Outro] जय जय अंबे, जय चामुंडे, संधि घड़ी की रानी माँ ढम ढम ढाक, झमाझम झाँझ, जग की तू कल्याणी माँ बोलो चामुंडा माता की जय, बोलो दुर्गा माता की जय 🙏 भजन अच्छा लगे तो Like करें, Share करें और ऐसे ही नवरात्रि भजनों के लिए चैनल को Subscribe करें 🔔 🪔 आप सभी को दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा और महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! जय माँ चामुंडा 🔱 #SandhiPuja #ChamundaMaa #DurgaPuja2026