खाटू श्याम जी की अमर गाथा kalyug ke Swami #khatushyam #krishna #khatu
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खाटू श्याम जी की अमर गाथा kalyug ke Swami #khatushyam #krishna #khatu
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खाटू श्याम जी की अमर गाथा
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lyrics
ॐ श्री श्याम देवाय नमः...
ॐ श्री श्याम देवाय नमः...
जय-जय श्री श्याम...
जय-जय श्री श्याम...
जय-जय खाटू वाले श्याम,
हारे का तू सहारा है।
जो भी तेरे द्वार पे आया,
भर दिया उसका प्याला है॥
शीश के दानी, दीनों के स्वामी,
तेरी महिमा न्यारी है।
सारे जग का पालनहारा,
श्याम हमारी बारी है॥
सुनो भक्तों, एक कथा है,
प्रेम और बलिदान की।
धरती पर अवतार हुआ था,
सच्चे धर्म महान की॥
महाभारत का समय था वह,
धर्म-अधर्म की जंग चली।
हर दिशा में रणभेरी गूँजी,
धरती जैसे आग जली॥
देव ऋषि सब देख रहे थे,
कैसा होगा यह परिणाम।
तब इतिहास बदलने आया,
एक अनोखा वीर महान॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
महाबली घटोत्कच के घर,
जन्म लिया उस लाल ने।
माता मोरवी की गोदी में,
खुशियाँ भर दी काल ने॥
नाम मिला उसको बर्बरीक,
वीरों में था सबसे न्यारा।
बचपन से ही तेज था ऐसा,
ज्यों सूरज का हो उजियारा॥
दया, धर्म और सत्य की राह,
उसने जीवन भर अपनाई।
निर्बल का बनकर रक्षक,
हर पल अपनी शक्ति लुटाई॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
बचपन में ही धनुष उठाया,
लक्ष्य कभी न चूका था।
शेर दहाड़े, पर्वत काँपे,
जब वीर रण में झूमा था॥
माता ने संस्कार सिखाए,
सत्य कभी मत छोड़ना।
जो भी निर्बल दिखे जगत में,
उसका साथ न छोड़ना॥
माँ की बातें हृदय में रखकर,
वीर बड़ा बलवान हुआ।
दुनिया देखे ऐसा योद्धा,
जिसका हर सम्मान हुआ॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
वन-वन जाकर तप किया उसने,
महादेव को ध्यान किया।
भोलेनाथ हुए प्रसन्न तब,
अद्भुत वरदान प्रदान किया॥
तीन बाण का दिव्य खजाना,
और धनुष अनुपम पाया।
जिस रणभूमि में कदम बढ़ाए,
विजय वहीं पर मुस्काया॥
देवगण भी चकित हुए सब,
ऐसा वीर कहाँ मिलता।
जिसके आगे काल भी आकर,
क्षण भर रुककर ही चलता॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
समय बढ़ा फिर युद्ध निकट था,
महाभारत का आया काल।
वीर बर्बरीक मन ही मन में,
करने लगा बड़ा सवाल॥
"किसका साथ निभाऊँ माता?
कौन यहाँ सच्चा कहलाए?"
मोरवी बोली—"सुन मेरे बेटे,
हारे का तू साथ निभाए।"
यही वचन जीवन का बनकर,
उसके मन में बस गया।
दीन-दुखी का साथ निभाना,
उसका सच्चा धर्म हुआ॥
आगे बढ़ा वह रण की ओर,
लेकर मन में धर्म महान।
रास्ते में मिलने वाले थे,
स्वयं जगत के भगवान॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
शीश के दानी...
दीनों के स्वामी...
जय श्री श्याम...
जय श्री श्याम…
जय-जय श्री श्याम...
जय-जय श्री श्याम...
हरि नाम की मधुर पुकार,
सुनो भक्तों अमर विचार॥
जय-जय खाटू वाले श्याम,
हारे का तू सहारा है।
तेरी लीला अपरंपार,
सारा जग तेरा प्यारा है॥
प्रातः बेला, शुभ था अवसर,
वीर चला रणधाम।
माता मोरवी ने आशीष दिया,
लेकर श्रीहरि का नाम॥
माथे तिलक, हृदय में साहस,
हाथों में दिव्य धनुष था।
तीन बाण की अद्भुत शक्ति,
जिस पर देवों का भी विश्वास था॥
माँ ने अंतिम बात सुनाई,
"वचन कभी मत तोड़ना।
जो भी रण में हार रहा हो,
उसका साथ न छोड़ना।"
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
वन के पथ पर एक ब्राह्मण,
मुस्काता-सा सामने आया।
साधारण-सा रूप था उसका,
पर मुख पर दिव्य प्रकाश समाया॥
पूछा उसने—"वीर बताओ,
कहाँ चले हो धनुष उठाए?"
बर्बरीक ने शीश झुकाकर,
मन की सारी बात सुनाए॥
"महाभारत का युद्ध देखने,
मैं रणभूमि तक जाऊँगा।
जो भी पक्ष कमजोर दिखेगा,
उसके संग मैं लड़ जाऊँगा।"
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
ब्राह्मण बोले—"तीन बाण से,
कैसे युद्ध जीत पाओगे?"
मुस्काकर वीर बर्बरीक बोला,
"प्रभु! अभी स्वयं जान जाओगे।"
एक बाण से चिन्ह लगाऊँ,
जिसे बचाना चाहूँ मैं।
दूजे से जिसको चाहूँ बाँधूँ,
तीसरे से जीतूँ मैं॥
तीनों लोकों में ऐसी शक्ति,
किसी ने पहले देखी ना।
देव, दानव, मानव सबने,
ऐसी लीला लेखी ना॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
ब्राह्मण बोले—"यदि ऐसा है,
तो एक परीक्षा हो जाए।
इस पीपल के सारे पत्ते,
एक ही बाण से छू जाएँ।"
धनुष चढ़ाया वीर ने तब,
मंत्रों का उच्चार किया।
छूटा बाण बिजली बनकर,
क्षण में अद्भुत काम किया॥
डाली-डाली, पत्ता-पत्ता,
सबको उसने छू डाला।
एक पत्ता जो चरण तले था,
उसके पास भी जा निकला॥
श्रीकृष्ण हँसे मन ही मन,
समझ गए यह कौन महान।
यह तो अद्भुत वीर है सचमुच,
धर्म निभाने वाला इंसान॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
हारे का तू सहारा है...
सोचे मन में योगेश्वर,
यदि यह रण में जाएगा।
हारे वाले पक्ष में जाकर,
युद्ध कभी न रुक पाएगा॥
धर्म की रक्षा करनी होगी,
समय यही बलिदान का।
जग को देना होगा संदेश,
सच्चे त्याग और सम्मान का॥
आँखों में करुणा थी गहरी,
हृदय में प्रेम अपार।
आने वाला था वह क्षण,
जो बदल दे संसार॥
अब ब्राह्मण नहीं, स्वयं श्रीकृष्ण,
अपने दिव्य रूप में आएँगे।
और वीर बर्बरीक से,
जीवन का सबसे बड़ा दान माँगेंगे॥
जय-जय खाटू वाले श्याम...
शीश के दानी...
हारे के सहारे...
जय श्री श्याम…
जय श्री श्याम...
जय श्री श्याम...
हरि की लीला अपरंपार...
श्याम का अमर उपकार...
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