होरी का घर गया, मगर महाजनों के हाथ भी कुछ न लगा! | गोदान भाग 26 | मुंशी प्रेमचंद
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होरी का घर गया, मगर महाजनों के हाथ भी कुछ न लगा! | गोदान भाग 26 | मुंशी प्रेमचंद
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होरी का घर गया, मगर महाजनों के हाथ भी कुछ न लगा! | गोदान भाग 26 | मुंशी प्रेमचंद
होरी का मकान पहले ही रेहन रखा जा चुका है, लेकिन अब उस मकान को लेकर महाजनों के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। देहात में उस मकान का कोई खरीददार नहीं मिलता। मकान हाथ में आ गया, मगर उसे बेचकर पैसा निकालना भी आसान नहीं।
दूसरी ओर, होरी के लिए तो घर पहले ही हाथ से निकल चुका है। एक गरीब किसान की बेबसी और उस व्यवस्था की विडंबना, जहाँ चीज़ पर कब्ज़ा तो हो जाता है लेकिन उसकी कीमत नहीं मिलती—इस प्रसंग में यही दर्द उभरकर सामने आता है।
मुंशी प्रेमचंद के अमर उपन्यास गोदान का यह महत्वपूर्ण भाग सुनिए सरल और सहज भाषा में।
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