Paryushan Parva Suhavno Ji | Paryushan | Jain Stavan | Samvatsari | Michami Dukkadam
Arvind_Bhakti_Songs
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🙏 पर्युषण पर्व सुहावणो जी 🙏
A beautiful Jain devotional bhajan celebrating the sacred festival of Paryushan, Tapasya, Prabhu Adinath, Neminath–Rajul and Bhagwan Mahavir.
🎵 Bhajan: Paryushan Parva Suhavno Ji
✍️ Lyrics: Arvind Jain
पर्युषण पर्व हमें तप, त्याग, क्षमा, जीव दया और प्रभु भक्ति की प्रेरणा देता है।
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पर्युषण पर्व सुहावणो जी, भक्ति रा दिन आठ
पर्युषण पर्व सुहावणो जी, भक्ति रा दिन आठ
तप री महिमा मोटी है जी, तप री महिमा मोटी है जी
टूटे पाप री गांठ, सगला करो बढ़ाई (होय)
चाहे अट्ठम हो अठाई (होय)
भक्ति सूं करो बधाई (होय)
धरा री ओढ़णी तपस्वी रंग छायो
कहीं अठाई हो रही जी, कहीं अट्ठम का जोर
कहीं अठाई हो रही जी, कहीं अट्ठम का जोर
सब मिल पखी कर रिया जी, सब मिल पखी कर रिया जी
भक्ति रही ठमठोर, पर्युषण खूब मनाओ (होय)
आंगी सूं प्रभु नो सजाओ (होय)
तप सूं कर्म घटाओ (होय)
धरा री ओढ़णी तपस्वी रंग छायो
आदि प्रभु नी वंदना ने, आदि प्रभु नो गान
आदि प्रभु नी वंदना ने, आदि प्रभु नो गान
घर-घर तप्स्या हो रही जी, घर-घर तप्स्या हो रही जी
लेकर प्रभु का नाम, प्रभु का क्या ही कहना (होय)
हमारे पहले जिनंदा (होय)
हमारे साथ ही रहना (होय)
धरा री ओढ़णी जिनंदा रंग छायो
नेम-राजुल री सुनो कहानी, आठ भवों रो साथ
नेम-राजुल री सुनो कहानी, आठ भवों रो साथ
तोरण सूं मुँह फोरियो जी, तोरण सूं मुँह फोरियो जी
सुनी पशुओं री पुकार, सभी गिरनार चलो रे (होय)
भवभव के पार चलो रे (होय)
प्रभु के पास चलो रे (होय)
धरा री ओढ़णी बसंती रंग छायो
पार्श्व चिंता मणि सोहणा जी, बैठा शंखेश्वर द्वार
पार्श्व चिंता मणि सोहणा जी, बैठा शंखेश्वर द्वार
आषाढ़ी थाने पूजिया जी, आषाढ़ी थाने पूजिया जी
पूज्या साल हज़ार, हरसाल शंखेश्वर जाना (होय)
प्रभु से आँख मिलाना (होय)
सुन्दर तवन सुनाना (होय)
धरा री ओढ़नी पारस संग भायो
वर्धमान ने महावीर बनकर, लियो मोक्ष निर्वाण
वर्धमान ने महावीर बनकर, लियो मोक्ष निर्वाण
जीव दया रे ध्येय सूं जी, जीव दया रे ध्येय सूं जी
कियो धर्म निर्माण, वीर री महिमा न्यारी (होय)
पूजती दुनिया सारी (होय)
जैन सब महावीर धारी (होय)
धरा री ओढ़णी प्रभुजी रंग छायो
पर्युषण पर्व सुहावणो जी, भक्ति रा दिन आठ
पर्युषण पर्व सुहावणो जी, भक्ति रा दिन आठ
तप री महिमा मोटी है जी, तप री महिमा मोटी है जी
टूटे पाप री गांठ, सगला करो बढ़ाई (होय)
चाहे अट्ठम हो अठाई (होय)
भक्ति सूं करो बधाई (होय)
धरा री ओढ़णी तपस्वी रंग छायो