बुधवार को गणेश भगवान की पूजा क्यों की जाती है? जानिए धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा | जय गणेश भगवान
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बुधवार को गणेश भगवान की पूजा क्यों की जाती है? जानिए धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। सप्ताह के सात दिनों में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुधवार को ही गणेश भगवान की
पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताएँ, बुध ग्रह से संबंध और एक पौराणिक कथा प्रचलित है। आइए इस विषय को विस्तार से समझते हैं।
1. बुधवार का दिन भगवान गणेश को क्यों समर्पित है? हिंदू धार्मिक परंपराओं में बुधवार का संबंध बुध ग्रह से माना जाता
है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, विवेक, शिक्षा, गणना और व्यापार का कारक माना गया है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि,
ज्ञान, विवेक और शुभ आरंभ के देवता माने जाते हैं।
इसी कारण बुधवार और भगवान गणेश के बीच विशेष संबंध माना जाता हैभक्त इस दिन गणेश जी की पूजा करके बुद्धि, ज्ञान,
एकाग्रता और कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं।
हालाँकि, बुधवार को गणेश जी की पूजा करने की परंपरा का कोई एक सर्वमान्य पौराणिक कारण नहीं है। यह मुख्य रूप से धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा-परंपराओं पर आधारित है
2. भगवान गणेश को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवताओं के बीच यह प्रश्न उठा कि सबसे पहले किस देवता की पूजा की जानी चाहिए। तब भगवान शिव ने सभी देवताओं से कहा कि जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही प्रथम पूज्य
कहलाएगा।
यह सुनकर सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर बैठकर संसार की परिक्रमा करने निकल पड़े। भगवान गणेश का वाहन मूषक था, इसलिए उनके लिए पूरे संसार की परिक्रमा करना कठिन था।
लेकिन गणेश जी ने अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग किया। उन्होंने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की और उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
जब उनसे इसका कारण पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मेरे लिए माता-पिता ही संपूर्ण संसार हैंउनके चरणों में ही सभी तीर्थ और समस्त जगत का निवास है।"
भगवान गणेश की इस बुद्धिमत्ता और मातृ-पितृ भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। तभी से किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। इस कथा के अलग-अलग रूप विभिन्न धार्मिक परंपराओं में मिलते हैं।