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Hindola Darshan / Hindola Vijay / hindola ke pad / Pushtimarg kirtan / Shrinathji / Shringaar

Shreeji Manorath by Ankita Dalal

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Hindola Darshan / Hindola Vijay / hindola ke pad / Pushtimarg kirtan / Shrinathji / Shringaar

2 349 просмотров · 2 года назад
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व्रज – भाद्रपद कृष्ण तृतीया Thursday, 22 August 2024 पुष्टि प्रणाली की रचना में श्री गुसाईंजी ने प्रवीणता पूर्वक प्रभु सुख के साथ ज्योतिषीय पक्ष को भी ध्यान में रखा है. भारतीय ज्योतिष के अनुसार हिंडोलना विजय बुधवार या शनिवार को नहीं किया जा सकता है. इसलिए भाद्रपद कृष्ण द्वितीया के दिन इन दोनों वार में यदि कोई पड़ता है तो प्रभु को एक अतिरिक्त दिन हिंडोलना झुलाया जाता है और अगले दिन हिंडोलना विजय किया जाता है. श्रीजी में आज सायं आरती पश्चात हिंडोलना विसर्जन होगा. चांदी को शुभ माना जाता है अतः प्रथम हिंडोलने की भांति ही हिंडोलना विजय के दिन भी श्री मदनमोहनजी चांदी के हिंडोलना में झूलते हैं. आचार्यचरण श्री महाप्रभुजी और प्रभुचरण श्री गुसाँईजी के समय से श्रीजी में लगभग 30 दिन हिंडोलना होते थे. भारतीय विक्रमाब्द 1995 में प्रधानगृह में श्री गोवर्द्धनलालजी का प्राकट्य हुआ जो कि हिंडोलना विजय के एक दिन उपरान्त हुआ. युवावस्था में श्री गोवर्धन लालजी के हृदय में मनोरथ हुआ कि श्रीजी मेरे जन्मदिन पर भी हिंडोलना में झूलें. इस मनोरथ को पूर्ण करने आपश्री ने सोने का भव्य हिन्डोलना सिद्ध करवाया. प्रभु प्रेरणा से आपने श्री चन्द्रावली जी स्वरूप श्री नवनीतप्रियाजी को पधराकर हिंडोलना झुलाये. पुष्टि प्रणाली की रचना में श्री गुसाईंजी ने प्रवीणता पूर्वक प्रभु सुख के साथ ज्योतिषीय पक्ष को भी ध्यान में रखा है. भारतीय ज्योतिष के अनुसार हिंडोलना विजय बुधवार या शनिवार को नहीं किया जा सकता है. इसलिए भाद्रपद कृष्ण द्वितीया के दिन इन दोनों वार में यदि कोई पड़ता है तो प्रभु को एक अतिरिक्त दिन हिंडोलना झुलाया जाता है और अगले दिन हिंडोलना विजय किया जाता है. श्रीजी में आज सायं हिंडोलना विजय होगा. संध्या-आरती दर्शन के पश्चात हिंडोलना विजय होता है. गोविन्दस्वामी के चार हिंडोलना के निम्नलिखित पद गाये जाते हैं. हिंडोलना विजय के पद कीर्तन – (राग : मल्हार) झूलन आई व्रजनारी गिरिधरनलालजु के सुरंग हिंडोरना l सुभग कंचन तन पहेरे कसुम्भी सारी गावत परस्पर हस मृदुबोलना ll 1 ll ईत नंदलाल रसिकवर सुन्दर ऊत वृषभानसुता छबि सोहना l रमकत रंग रह्यो पियप्यारी ‘गोविंद’ बलबल रतिपति जोहना ll 2 ll कीर्तन – (राग : मल्हार) झूलत सुरंग हिंडोरे राधामोहन l बरन बरन चूनरी पहेरे व्रजवधू चंहू ओरे ll 1 ll राग मल्हार अलापत सातसूरन तीनग्राम जोरे l मदनमोहन जु की या छबि ऊपर ‘गोविंद’ बल तृण तोरे ll 2 ll कीर्तन – (राग : मल्हार) तैसोई वृन्दावन तेसीये हरित भूमि तेसीये वीर वधू चलत सुहाई माई l तेसोई कोकिल कल कुहुकुहु कुंजत तेसोई नाचत मोर निरखत नयना सुखदाई ll 1 ll तेसीय नवरंग नवरंग बनी जोरी तेसेई गावत राग मल्हार तान मन भाई l ‘गोविंद’ प्रभु सुरंग हिंडोरे झूले फूले आछे रंग भरे चंहु दिशते घटा जुरि आई ll 2 ll कीर्तन – (राग : मल्हार) रंग मच्यो सिंघद्वार हिंडोरे व झूलना l गौरश्याम तन नील पीतपट घनदामिनी हेम बिराजत निरख निरख व्रजजन मन फूलना ll 1 ll ऊर पर वनमाल सोहे इन्द्रधनुष मानो उदित भयो मोतीनहार बगपंगति समतूलना l वरषत नवरूप वारी घोख अवनि रत्न खचित ‘गोविंद’ प्रभु निरख कोटि मदन भूलना ll 2 ll अंतिम कीर्तन के उपरांत मुखियाजी, सभी भीतरिया आदि सेवक हिंडोलना की परिक्रमा करते हैं एवं तत्पश्चात आरती की जाती है और ठाकुरजी हिंडोलना से भीतर पधरा लिए जाते हैं. श्रीजी के उस्ताखाना के सेवक हिंडोलना की सभी साजा बड़ी कर लेते हैं. आज से हिंडोलने की बिछायत, दीवालगरी आदि उतार लिए जाते हैं. केवल मणिकोठा में आगामी सप्तमी तक दीवालगरी रहती है. #darshan #latest #sawanspecial #hindutemple #2024 #shreejimanorathbyankitadalal #laddugopal #hindolautsav #hindolabhajan #shringar