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Kaharawa ke 2 behatarin theke .1-besic theka 2- thapi ka theka .sikhe #thapaki#kaharwataal#bollywood

DK Dholakiya

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Kaharawa ke 2 behatarin theke .1-besic theka 2- thapi ka theka .sikhe #thapaki#kaharwataal#bollywood

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DK Dholakiya
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Kaharawa ke 2 behatarin theke .1-besic theka 2- thapi ka theka .sikhe #thapaki#kaharwataal#bollywood कहरवा ताल भारतीय संगीत (विशेषकर सुगम संगीत, लोक संगीत, भजन और फिल्मी गानों) में सबसे ज्यादा बजाया जाने वाला और लोकप्रिय ताल है। यह बहुत ही सरल और कर्णप्रिय ताल है।कहरवा ताल का पूरा परिचय और विवरण नीचे दिया गया है:मुख्य विशेषताएँ (Key Features)कुल मात्राएँ: 8 मात्राएँविभाग: 2 विभाग (4-4 मात्राओं के दो बराबर भाग)ताली (भरी): पहली (1st) मात्रा पर (जिसे 'सम' भी कहते हैं)खाली: पाँचवीं (5th) मात्रा परलय: यह मुख्य रूप से मध्य लय और द्रुत (तेज) लय में बजाया जाता है।कहरवा ताल का मूल ठेका और संकेत (Notation)मात्रा (Beats)12345678बोल (Bols)धागेनातीनाकधीनाचिह्न (Sign)X (ताली)0 (खाली) 💖🌎👌👍💝❤️💯🎵🎶💞🏓🎧🔊🤩❤️❤️ (धा गे ना ती । ना क धिन ना" )ताल का विवरण (Description)संरचना: इस ताल में कुल 8 बीट्स (मात्राएँ) होती हैं। इन्हें 4-4 मात्राओं के दो भागों (विभागों) में बांटा गया है। पहले विभाग की शुरुआत ताली से और दूसरे विभाग की शुरुआत खाली (हाथ हवा में हिलाकर) से होती है।उपयोग: यह ताल शास्त्रीय संगीत में बहुत कम, लेकिन भजन, कीर्तन, गजल, कव्वाली, लोकगीत और बॉलीवुड गानों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। तबला, ढोलक और नाल जैसे वाद्यों पर इसके सैकड़ों प्रकार (variations) बजाए जाते हैं。लोकप्रियता: सुगम संगीत के लगभग 70-80% गानों में किसी न किसी रूप में कहरवा ताल का ही प्रयोग किया जाता है।