ऐतिहासिक हारदूध मेला | सोमेश्वर देवता भंगेली | लोक संस्कृति की झलक
Gidara Bugyal Bhangeli
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ऐतिहासिक हारदूध मेला | सोमेश्वर देवता भंगेली | लोक संस्कृति की झलक
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20 गत्ते सावन ऐतिहासिक व पारंपरिक हारदूध मेला | सोमेश्वर देवता ग्राम भंगेली
🌿 20 गत्ते सावन ऐतिहासिक व पारंपरिक हारदूध मेला – सोमेश्वर देवता, ग्राम भंगेली (उत्तराखंड) 🌿
इस वीडियो में देखिए ग्राम भंगेली में आयोजित सोमेश्वर देवता के ऐतिहासिक हारदूध मेले की झलकियाँ।
यह पारंपरिक मेला हर साल 20 गत्ते सावन के शुभ अवसर पर बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
मेले में भक्तगण दूर-दूर से आकर सोमेश्वर देवता का आशीर्वाद लेते हैं और लोक संस्कृति, भक्ति, संगीत, और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
सोमेश्वर देवता की झांकी और पूजा-अर्चना
ग्राम भंगेली का लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय उत्सव की झलक
सावन माह की पवित्रता और भक्ति भावना
🕉️ जय सोमेश्वर देवता!
📍 स्थान: ग्राम भंगेली, उत्तराखंड
📅 अवसर: 20 गत्ते सावन हारदूध मेला
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#गढ़ संस्कृति को संजोए रखने में उत्तरकाशी जिले का अलग ही पहचान है. गंगा- यमुना, देवी-देवताओं और अपने विशेष संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले में आज भी ऐसे कई चमत्कार देखने को मिलते हैं जो तकनीकी युग में भी देवभूमि शब्द को सार्थक करते हैं. यहां आज भी पश्वों की आराधना पर देवता अवतरित होते हैं. यहां हर देवता को बुलाने की अलग और अनोखी विधि होती है. ऐसे ही सोमेश्वर देवता (Someshwara devta of Uttarkashi) &, जिनकी आराधना की विधि अलग ही है. सोमेश्वर देवता को उत्तरकाशी के सभी ब्लॉकों के सैकड़ों गांवों में पूजा जाता है. इनका आसन तेज धार की डांगरियों पर सीटियों के साथ लगता है
आस्था और श्रद्धा ही है जो पश्वा के पैरों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता है. इसे लोग सोमेश्वर देवता का आशीर्वाद मानते हैं. देवता के पश्वा डेढ़ सौ मीटर डांगरियों पर चलते-चलते ग्रामीणों की समस्या सुनते हैं. साथ ही ग्रामीणों को मनोकामना के अनुसार उन्हें आशीर्वाद भी देते हैं.
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