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Story of Brijesh Singh from Being a Don to a Political Leader | Mukhtar Ansari | #dawood #don

Khabar Chowk 2.0

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Story of Brijesh Singh from Being a Don to a Political Leader | Mukhtar Ansari | #dawood #don

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Story of Brijesh Singh from Being a Don to a Political Leader | #mukhtar Ansari | #dawood #don #brijeshsingh #yogiadityanath #tashanbaaz बृजेश ने अपने पहले हत्याकांड को फ़िल्मी स्टाइल में अंजाम दिया। हरिहर सिंह के घर गए, उसके पैर छुए और गोली मार दी। पिता की हत्या का बदला पूरा हो चुका था। वो चाहते तो क़ानून के सामने सरेंडर करके दोबारा सामान्य ज़िंदगी शुरू कर सकते थे। लेकिन, बृजेश सिंह की तक़दीर ने कुछ और ही तय कर रखा था। लोगों को लग रहा था कि शायद बृजेश सिंह का गुस्सा अब शांत हो गया है। लेकिन एक बरस बाद एक और बड़ी वारदात हुई साल- 1988 बृजेश सिंह जेल से कोर्ट में पेशी के लिए आते वक़्त पुलिस हिरासत से फ़रार हो गए थे। उन्होंने मुख़्तार अंसारी के आपराधिक गुरु और त्रिभुवन सिंह के पिता के हत्यारे साधु सिंह को मारने के लिए बहुत बड़ी साज़िश रची वेश बदलने में बृजेश सिंह माहिर थे। सबको मालूम हो गया कि बाहुबली मुख़्तार को किसी ने बहुत बड़ी चुनौती दी है। धीरे-धीरे बृजेश के अपराध और ख़ौफ़ का नेटवर्क यूपी से बिहार, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैल गया। कोयला माफिया सूरजदेव सिंह से लेकर बिहार के माफिया सूरजभान तक हर कोई बृजेश सिंह से जुड़ने लगा। ऐसे में मुख्तार अंसारी ने एक एक कर बृजेश सिंह के करीबियों को निपटाना शुरू किया। अब खुलकर मुख्तार और बृजेश सिंह गैंग आमने सामने आ गए। बृजेश सिंह से चल रही अदावत के बीच मुख्तार अंसारी इतना समझ गया था कि बृजेश सिंह को इतने आसानी से शांत नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मुख्तार ने जरायम की दुनिया के साथ साथ सियासी गलियों में अपना दबदबा कायम रखने का फैसला किया। 1996 में मुख्तार अंसारी मऊ से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बना