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मौन, शब्द और सत्य का रहस्य | अष्टावक्र महागीता Part 23

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मौन, शब्द और सत्य का रहस्य | अष्टावक्र महागीता Part 23

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"सत्य को कहा नहीं जा सकता, इसलिए बार-बार कहना पड़ता है..." अष्टावक्र महागीता के इस 23वें भाग में ओशो शब्द, शास्त्र और मौन के गहरे रहस्य को उजागर करते हैं। जैसे मुट्ठी बांधने पर आकाश बाहर छूट जाता है और मुट्ठी खोलते ही आकाश भीतर समा जाता है—ठीक वैसे ही मौन में सत्य ठहरता है और शब्दों में खो जाता है। शास्त्र केवल खाली बर्तन हैं, सत्य स्वयं का अनुभव है। सद्गुरु और वचनों के सानिध्य में बैठकर कैसे अंतर की प्यास और आंतरिक अग्नि प्रज्वलित होती है, जानिए इस अद्भुत और गहरे सत्संग में। इस प्रवचन के मुख्य बिंदु: 00:00 – सत्य और शब्दों की सीमा 01:20 – खुली मुट्ठी और आकाश का रहस्य 02:35 – आंतरिक अग्नि को जगाने का माध्यम: सत्संग 03:30 – शब्द और शास्त्र केवल खाली पात्र हैं 04:25 – कुहासा और सद्गुरु के सानिध्य का प्रभाव 🌸 अष्टावक्र महागीता की पूरी श्रृंखला देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें और प्लेलिस्ट ज़रूर देखें। #AshtavakraGita #OshoHindi #SpiritualDiscourse #Meditation #AdvaitaVedanta #SummeryAZ