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योजना का बोर्ड नहीं, मुंशी की जानकारी नहीं! जलडेगा के पैतानो में अगर किसके निगरानी में बन रही सड़क?

जलडेगा ग्रामीण समाचार

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योजना का बोर्ड नहीं, मुंशी की जानकारी नहीं! जलडेगा के पैतानो में अगर किसके निगरानी में बन रही सड़क?

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योजना का बोर्ड नहीं, मुंशी को जानकारी नहीं; जलडेगा के पैतानो में आखिर किसकी निगरानी में बन रही 22 लाख की सड़क? जलडेगा प्रखंड के पैतानो में जिला परिषद मद से विशेष प्रमंडल द्वारा लगभग 22 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही पीसीसी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और विभागीय दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण स्थल पर योजना बोर्ड लगाए बिना ही काम शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में रात के अंधेरे में खेत से लाई गई मिट्टीयुक्त बालू का इस्तेमाल किया गया। जमीन पर मिट्टी डालकर उसके ऊपर ईंटें बिछाई जा रही थीं। साथ ही चिमनी ईंट के साथ बंगला भट्ठा ईंटों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। इस संबंध में सवाल पूछने पर काम करा रहे व्यक्ति ने बंगला भट्ठा ईंट को भी चिमनी ईंट बताया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। योजना की जानकारी नहीं, मीडिया से दुर्व्यवहार का आरोप निर्माण कार्य की जानकारी लेने मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों के अनुसार, खुद को मुंशी बताने वाले व्यक्ति ने योजना, विभाग और संवेदक के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। उसने अपना नाम बताने से भी इनकार कर दिया। आरोप है कि उसने मीडिया कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए चुनौतीपूर्ण लहजे में बात की। इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला परिषद सदस्य ने दी जानकारी जिला परिषद सदस्य शांता रोजालिया ने बताया कि सड़क का निर्माण जिला परिषद मद से हो रहा है और इसकी निगरानी विशेष प्रमंडल करेगा। उन्होंने कहा कि योजना का टेंडर प्रमोद कुमार के नाम से स्वीकृत है, जबकि वैभव ठाकुर नामक युवक ने पेटी पर काम लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सहायक अभियंता ने नहीं उठाया फोन, कार्यपालक अभियंता ने दिया आश्वासन विभाग का पक्ष जानने के लिए विशेष प्रमंडल के सहायक अभियंता नवीन को अलग-अलग नंबरों से नौ बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया। इसके बाद कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार से बात की गई। उन्होंने कहा कि योजना बोर्ड लगाए बिना काम शुरू नहीं होना चाहिए। निर्माण में गुणवत्ता की कमी मिलने पर सड़क दोबारा बनवाई जाएगी और तब तक भुगतान रोक दिया जाएगा।