जब भी ये दोहा सुनोगे, रो पड़ोगे 💔 | Sant Kabir Bhajan | चकवी बिछुरी रैन की | Kabira #santkabir
Kabira
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जब भी ये दोहा सुनोगे, रो पड़ोगे 💔 | Sant Kabir Bhajan | चकवी बिछुरी रैन की | Kabira #santkabir
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💔 कुछ दोहे सिर्फ़ सुने नहीं जाते, दिल में उतर जाते हैं…
“जब भी ये दोहा सुनोगे, रो पड़ोगे” — संत कबीर की विचारधारा से प्रेरित एक भावपूर्ण निर्गुण भजन, जो विरह, अकेलेपन, जीवन की नश्वरता और परमात्मा से मिलन की तलाश को महसूस कराता है।
🪔 दोहा:
चकवी बिछुरी रैन की, आई मिली परभात।
जे नर बिछुरे राम सों, ना दिन मिले न रात॥
इस दोहे का भाव हमें अपने भीतर झाँकने और उस आध्यात्मिक दूरी को समझने की प्रेरणा देता है, जिसे इंसान संसार की भीड़ में अक्सर भूल जाता है।
🎵 Song: जब भी ये दोहा सुनोगे, रो पड़ोगे
🎙️ Channel: Kabira
🎶 Genre: Nirgun Bhajan | Spiritual Folk | Sant Kabir Inspired Music
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नोट: दोहे के पाठ और ऐतिहासिक श्रेय के अलग-अलग प्रचलित रूप मिल सकते हैं। इसे कबीर की प्रमाणित मूल वाणी के रूप में प्रस्तुत करने से पहले किसी विश्वसनीय स्रोत से पाठ का मिलान करें।
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