L404-: योग वाशिष्ठ (सत्र 21)- असीम चेतना, माया का भ्रम और आत्मज्ञान की प्राप्ति
Dr Naresh Chandra-Simplicity in Knowledge
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नमस्कार मित्रों !
जय श्री राम।
योग वाशिष्ठ के 21वें सत्र में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
आज के इस विशेष लाइव सत्र में हम महर्षि वशिष्ठ और भगवान श्री राम के पावन संवाद के माध्यम से अध्यात्म और जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझेंगे।
आज की चर्चा के मुख्य बिंदु:
असीम चेतना और ब्रह्म: चेतना की सर्वव्यापकता और आत्मा का वास्तविक स्वरूप।
सृष्टि और मन का संबंध: मन ही कर्ता और भोक्ता है; मन के शांत होने पर सत्य का बोध।
माया का भ्रम और निवारण: अज्ञान कैसे दूर हो और अद्वैत स्थिति की प्राप्ति कैसे हो।
क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ: शरीर (क्षेत्र) और उसे जानने वाली साक्षी चेतना (क्षेत्रज्ञ) का विस्तृत विश्लेषण।
महर्षि वाशिष्ठ के इस अमर ज्ञान-गंगा में गोता लगाने और आत्म-ज्ञान की अनुभूति के लिए सत्र के अंत तक ज़रूर जुड़े रहें। वीडियो को लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
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