Kumaoni Traditional Song | Mangal Geet | शकुन आंखर | कुमाउनी शकुनाखर
Vinod Gariya
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Vinod Gariya
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उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचल में किसी भी मांगलिक अवसर पर आपने कुछ बूढी महिलाओं को एक सुरीली लय में गाते सुना होगा, शकुना दे, शकुनाऽऽऽऽऽऽ यो काज अति नीकोऽऽऽ रे। इन्हें शकुन आंखर/मांगल गीत कहा जाता है, आज के भौतिक और व्यवहारिक युग में यह मांगल गीत जिसमें अवसर का न्यूता पितरों, देवों, फूलों, भंवरों आदि को दिया जाता था, वह कहीं अपनी पहचान के लिये छटपटा रहे हैं।
शकुनाखर की एक दुर्लभ वीडियो आप सभी तक पहुँचाने की कोशिश की है। सुनिये इन आंखरों को और हमारी अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश करें।
Lyrics :
जा रे भंवरिया पितरों का देश-पितरों का द्वार ए,
को रे होलो पितरों का देश, पितरों का द्वार ए?
आधा सरग चन्द्र सुरीज, आधा सरग पितरों का द्वार ए।
सरग तैं पुछना छन दशरथ ज्य़ू ए।
की रे पूत ले, पूत नांति लै, की रे बहुवे ले दिवायो छ न्यूंतो, बढ़ायों उछव?
जो रे तुमें लै नाना छीना दूददोया,
नेत्र पोछा घृतमाला अमृत सींचा,
उं रे तुमें ले भला घरे की, भला वसै की सीतादेहिं आंणी, बहुराणीं आणी,
जीरो पूतो-पूतो, नातियां लाख बरीख,
तुमरी सोहागिनी जनम आइवांती जनम पुत्रावान्ती ए॥
विवाह के अवसर पर भंवरे को पितृलोक में पितरों को निमंत्रण देने के लिये इस गीत में कहा जा रहा है।