सूखे पत्ते की तरह बिखरे हुए थे हम,किसी ने बड़े प्यार से समेटा और आग लगा दी....!!
Garib Bahan 91
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सूखे पत्ते की तरह बिखरे हुए थे हम,किसी ने बड़े प्यार से समेटा और आग लगा दी....!!
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