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Khel Abhi Baaki | New Hindi Rap Song | Motivational Song | Lyrics provided in Description |

Lay Lok

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Khel Abhi Baaki | New Hindi Rap Song | Motivational Song | Lyrics provided in Description |

45 просмотров · 1 день назад
Lay Lok
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45 просмотров · 1 день назад
The lyrics are provided here just sing with it and feel the confidence खेल अभी बाकी VERSE 1 चुप था तो समझे शायद डर गया, पीछे था थोड़ा, तो बोले मर गया। वक़्त ने दबाया, मैं और उभर गया, जिस मोड़ पे रोका, वहीं से गुज़र गया। जेब थी खाली , पर हौसला भारी, देखी है धूप, नहीं माँगी छाँव उधारी। गिरने की आदत ने डरना मिटाया, हर एक ठोकर ने कुछ नया सिखाया। नाम नहीं था, तो नाम बना लेंगे, बंद दरवाज़े हैं तो राह बना लेंगे। आज जो हँसते हैं, हँसने दे उनको, कल उनको अपनी पहचान बता देंगे। ना ताज चाहिए, ना झूठी शान, बस काम बोले और बने पहचान। अभी मत पूछो कहाँ तक जाएगा, खेल अभी बाकी है, याद रहेगा नाम। HOOK कल तक ख़ामोश, आज ख़बर है, नाम छोटा सही, असर मगर है। कल तक जो कहते थे — “कौन है ये?” आज उन्हीं के बीच मेरा ज़िकर है। कल तक ख़ामोश — अब शोर है! रास्ता अपना — दौर है! नाम याद रखना, बात ये पक्की, खेल अभी बाकी है — और बारी हमारी! चुप्पी हमारी थी — अब गूँज हमारी । VERSE 2 आज अकेला खड़ा हूँ, कल पीछे भीड़ आ जाएगी। आज पूछे ना कोई, कल लाइनें लग जाएँगी। मैं मेहनत का भूखा हूँ, ना बनना मुझको कूल है। आज साहब जो समझे ख़ुदको, वो खाली ही धूल है। नाम मेरा याद रख, बाकी सब फ़िज़ूल है, ज़िंदगी में कमज़ोर नहीं, हमारा भी उसूल है। HOOK कल तक ख़ामोश, आज ख़बर है, नाम छोटा सही, असर मगर है। कल तक जो कहते थे — “कौन है ये?” आज उन्हीं के बीच मेरा ज़िकर है। कल तक ख़ामोश — अब शोर है! रास्ता अपना — दौर है! नाम याद रखना, बात ये पक्की, खेल अभी बाकी है — और बारी हमारी! चुप्पी हमारी थी — अब गूँज हमारी । VERSE 3 ना चेहरों के पीछे भागा, ना दिखावे में नाम किया, महफ़िलों में चुप रहा, ना ख़ुद का कोई ऐलान किया। लोग समझे ख़ामोशी का मतलब डर है, उन्हें क्या पता, अंदर कितना ज़हर है। लोग दिखने की होड़ में थे, मैं ख़ुद को गढ़ रहा था, सबको दुनिया देख रही थी, मैं अपना कल पढ़ रहा था। वो शोर में खोए रहे, मैं ख़ामोशी में पलता रहा, जिसे वो समझे ठहराव, मैं उसी में बदलता रहा। FINAL HOOK कल तक ख़ामोश, आज ख़बर है, नाम छोटा सही, असर मगर है। कल तक जो कहते थे — “कौन है ये?” आज उन्हीं के बीच मेरा ज़िकर है। कल तक ख़ामोश — अब शोर है! रास्ता अपना — दौर है! नाम याद रखना, बात ये पक्की, खेल अभी बाकी है — और बारी हमारी! चुप्पी हमारी थी — अब गूँज हमारी ।