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सिपाही जिसकी कलम बंदूकों पर भारी थी:- मुंशी प्रेमचंद/ Munshi Premchand

शब्द बाण

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सिपाही जिसकी कलम बंदूकों पर भारी थी:- मुंशी प्रेमचंद/ Munshi Premchand

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शब्द बाण
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नमस्कार दोस्तों मैं बजरंग प्रजापति आज आपको रूबरू कराने वाला हूं एक कलम के सिपाही से जिसे हम सब लोग मुंशी प्रेमचंद के नाम से जानते हैं एक ऐसा सिपाही जिसकी कलाम अंग्रेजों के दमन चक्र और उनकी बंदूकों पर भारी पड़ी एक ऐसा नायक जिसने अपनी कलम से पूरे भारत को जगाने का काम किया यह कैसा नायक जो पूरी जिंदगी गरीबी में जीता रहा मगर देश के लिए लिखता रहा एक ऐसा नायक जिसे हम शायद भूल गए हैं लेकिन हिंदी साहित्य उसके महा योगदान को नहीं भूल सकता अगर आप हिंदी को जानते हैं और आप प्रेमचंद को नहीं जानते तो फिर आपने हिंदी में कुछ नहीं जाना ऐसा ही कहां जाता है इस उपन्यास सम्राट के बारे में तो चलिए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ और पहलुओं के बारे में