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बिहार के अंशकालिक शारीरिक शिक्षकों के वेतन पर कमीशन का खेल, कई जिलों में भुगतान लम्बित

खेल और खिलाड़ियों की आवाज - खेलपथ

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बिहार के अंशकालिक शारीरिक शिक्षकों के वेतन पर कमीशन का खेल, कई जिलों में भुगतान लम्बित

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खेल और खिलाड़ियों की आवाज - खेलपथ
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शिक्षकों की मेहनत का सम्मान कब? भुगतान के लिए तरसते बिहार के शारीरिक शिक्षा अनुदेशक मेहनत हमारी, इंतजार हमारा—आखिर कब मिलेगा सम्मान? बिहार के अंशकालिक शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक आज समय पर मानदेय नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। बच्चों को स्वस्थ रहने, अनुशासन सीखने और खेल के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले इन शिक्षकों का अपना जीवन ही आर्थिक परेशानियों से घिरा हुआ है। हर महीने परिवार की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और रोजमर्रा के खर्च सामने खड़े रहते हैं, लेकिन मानदेय समय पर नहीं मिलता। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऊपर से यदि अधिकारियों के स्तर पर भी परेशानी का सामना करना पड़े, तो इन शिक्षकों की पीड़ा और बढ़ जाती है। विडंबना देखिए, जो शिक्षक बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं, उनका अपना वर्तमान ही अनिश्चितता में गुजर रहा है। वे भी इंसान हैं, उनके भी परिवार हैं, सपने हैं और जरूरतें हैं। उन्हें भी अपने परिश्रम का उचित सम्मान और समय पर भुगतान पाने का अधिकार है। सरकार और संबंधित अधिकारियों से बस इतनी-सी अपील है कि इन अनुदेशकों की समस्याओं को गंभीरता से समझें। मानदेय कोई एहसान नहीं, बल्कि उनके काम का अधिकार है। भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि उन्हें अपने ही मेहनत के पैसे के लिए बार-बार परेशान न होना पड़े। आखिर कब तक इन शिक्षकों की मेहनत इंतजार करती रहेगी? कब उनकी आवाज सुनी जाएगी? याद रखिए, जब शिक्षक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होगा, तो शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी। इसलिए जरूरत है कि बिहार के अंशकालिक शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माता समझा जाए। उनकी मांग बहुत बड़ी नहीं है—बस समय पर मानदेय,सम्मानजनक व्यवहार और अपने अधिकारों के लिए अनावश्यक परेशानी से मुक्ति।