Перейти к содержимому

ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं | Mental Health Day Song | Hindi Emotional Song

Chill & Soulful

0:00 / 0:00

ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं | Mental Health Day Song | Hindi Emotional Song

114 просмотров · 2 нед. назад
Chill & Soulful
12 подписчиков
114 просмотров · 2 нед. назад
ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं 💙 World Mental Health Day (10 October) पर एक भावुक हिंदी गीत, उन सबके लिए जो थके हैं, चुप हैं, फिर भी चल रहे हैं। अगर आज आपका मन भारी है, तो ये गीत आपके लिए है। आप अकेले नहीं हैं। कह देना भी हिम्मत है, रो लेना भी जीत है, और मदद माँगना कमज़ोरी नहीं है। 🌿 🎧 इस गीत में: धुंधले रास्तों और थके कदमों की बात खामोशी से बाहर आकर सच कहने की हिम्मत टूटकर भी न झुकने का हौसला धुंध छटने की उम्मीद 📝 लिरिक्स (Lyrics): ठहरी है साँस अंतरा 1 यहाँ हर रास्ता धुंधला सा है, कदम थके हैं, पर चलना भी है। हवा में जैसे भारी बोझ घुला है, दिल का हर कोना सवाल बना है। दीवारें मुझसे बातें करती हैं, मेरी ही परछाईं मुझसे डरती है। अँधेरों में इक चेहरा ढूँढता हूँ, अपने ही अक्स से सच पूछता हूँ। प्री-कोरस लगता है मैं ही तन्हा हूँ यहाँ, पर हर चेहरे के पीछे इक थकी दास्ताँ। कोई तो कह दे, "मैं भी हूँ यहीं", बस इतनी सी बात, और कुछ भी नहीं। कोरस ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं, टूटा हूँ फिर भी, झुकना नहीं। धीरे से ही सही, पर आगे बढ़ना है, खामोशियों से अब सच कहना है। ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं, टूटा हूँ फिर भी, झुकना नहीं। अंतरा 2 आवाज़ें आधी-अधूरी सी हैं, हर एक खामोशी गहरी सी है। लोग कहते हैं, "मुश्किल है रास्ता", पर दर्द से मेरा गहरा वास्ता। सिसकियाँ दबी हैं इस सीने में, सदियों सा लगता है जीने में। पर रास्ता मुझे खुद ही बनाना है, इस बोझ को चलना सिखाना है। प्री-कोरस लगता है मैं ही तन्हा हूँ यहाँ, पर हर चेहरे के पीछे इक थकी दास्ताँ। कोई तो कह दे, "मैं भी हूँ यहीं", बस इतनी सी बात, और कुछ भी नहीं। कोरस ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं, टूटा हूँ फिर भी, झुकना नहीं। धीरे से ही सही, पर आगे बढ़ना है, खामोशियों से अब सच कहना है। ठहरी है साँस, पर रुकना नहीं, टूटा हूँ फिर भी, झुकना नहीं। ब्रिज (धीमा, लगभग फुसफुसाकर) कह देना भी हिम्मत है, रो लेना भी जीत है। हाथ बढ़ाना कमज़ोरी नहीं, यही तो सच्ची रीत है। जो बोझ अकेले भारी था, बाँटा तो हल्का होने लगा। जो दर्द दबा था बरसों से, लफ़्ज़ों में ढलकर रोने लगा। अंतरा 3 अब हर सुबह इक सवाल नहीं, थोड़ा सा सुकून है, मलाल नहीं। छोटी-छोटी साँसों में उम्मीद पली, धूप दरारों से अंदर चली। जो गिरा था मैं, वो मैं ही था, जो उठ रहा हूँ, वो भी मैं ही हूँ। हार और जीत के इस दरमियाँ, खुद को सँभालता, मैं यहीं हूँ। फ़ाइनल कोरस (पूरी ताक़त से) थमी थी साँस, पर रुका नहीं, टूटा था मैं, पर झुका नहीं। धीरे-धीरे अब आगे बढ़ा हूँ, खामोशियों को आवाज़ दे चला हूँ। थमी थी साँस, पर रुका नहीं, टूटा था मैं, पर झुका नहीं। आउट्रो धुंध छटेगी एक दिन सारी, मुश्किल है, पर कोशिश है जारी। रुका नहीं मैं, बस ठहरा था, अपने ही घर लौट आया हूँ। ख़ुशी ढूँढ ली है इस सफ़र में, अब तन्हा नहीं, मैं सबके साथ हूँ। 💬 आपकी बारी: इस गीत की कौन-सी पंक्ति आपके दिल को छू गई? कमेंट में ज़रूर बताइए। और किसी ऐसे दोस्त या अपने को ये गीत भेजिए जिसे आज इसकी ज़रूरत हो। 🤍 🔔 ऐसे और गीतों के लिए ChillSoulful_2 को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएँ। ⚠️ अगर आप या आपका कोई अपना बहुत परेशान है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से ज़रूर बात करें। बात करने से बोझ हल्का होता है। #WorldMentalHealthDay #MentalHealthAwareness #HindiSong #EmotionalHindiSong #ThahriHaiSaans #HindiLyrics #YouAreNotAlone #Shorts