वीर शिरोमणि श्री रूपारामजी तरक का पौराणिक इतिहास | कीलवा सांचौर
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सांचौर के वीर शिरोमणि रूपाराम तरक कीलवा की गाथा का एक बोलता हुआ स्तंभ जो 888 साल से इतिहास की गवाही दे रहा है...
राव श्री रूपारामजी तरक न केवल आंजणा समाज के गौरव थे, बल्कि समूचे मानव समाज के लिए एक प्रेरणा बन गए, जिन्होंने करीब 900 वर्ष पूर्व टक्का प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त कर 1600 कन्याओं का सामूहिक विवाह करवाया और हिंदू धर्म की गरिमा को स्थापित किया। रूपारामजी ने नारी सम्मान की जो अलख जगाई, वह आज भी कीलवा गांव में मौजूद ऐतिहासिक तोरण स्तंभों की तरह अमर है। उन्होंने समाज को जोड़ा, 36 कौम की एकता को मजबूत किया और यह साबित कर दिया कि जब एक निष्ठावान व्यक्ति समाज हित में आगे बढ़ता है तो इतिहास लिखा जाता है। "मायड़ ऐड़ा पुत जण जैड़ा आंजणा रूपा तरक" जैसी पंक्तियाँ आज भी उनके गौरव को गाती हैं, और यह संदेश देती हैं कि अगर हम आज भी एकजुट हों, तो फिर से एक स्वर्णिम युग की शुरुआत संभव है।
जय राजेश्वर भगवान 👏🙏