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*प्रकृति के 3 गुण आत्मा को शरीर से कैसे बांधते हैं ? | Shrimad Bhagavad Gita | Adhyay-14, Shlok- 5

DR B K SHARMA

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*प्रकृति के 3 गुण आत्मा को शरीर से कैसे बांधते हैं ? | Shrimad Bhagavad Gita | Adhyay-14, Shlok- 5

55 просмотров · 7 дн. назад
DR B K SHARMA
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नमस्ते दर्शकों, ॐ श्री परमात्मने नमः। श्रीमद् भगवद् गीता के अध्याय 14 (गुणत्रयविभागयोग) के श्लोक 5 के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है। इस वीडियो में डॉ बी के शर्मा जी द्वारा इस अत्यंत महत्वपूर्ण श्लोक का सरल सार-भाव विवेचन प्रस्तुत किया गया है। भगवान श्रीकृष्ण यहाँ से प्रकृति के तीनों गुणों की मुख्य व्याख्या शुरू करते हुए अर्जुन से कहते हैं— "सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः। निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्॥" अर्थात, हे महाबाहु अर्जुन! सत्त्व गुण, रजोगुण और तमोगुण—ये प्रकृति से उत्पन्न तीनों गुण इस अविनाशी और निर्विकार जीवात्मा को शरीर में बांध देते हैं। भौतिक संसार में आने के बाद आत्मा किस प्रकार इन गुणों के अधीन हो जाती है, इसका गहरा रहस्य इस श्लोक में छिपा है। इस वीडियो में मुख्य चर्चा: ✨ सत्त्व, रज और तम गुणों की उत्पत्ति का मूल आधार। ✨ अविनाशी आत्मा का नश्वर शरीर और भौतिक गुणों से बंधने का रहस्य। ✨ डॉ बी के शर्मा जी द्वारा व्यावहारिक जीवन के उदाहरणों के साथ सरल और मर्मस्पर्शी व्याख्या। यदि आपको गीता जी का यह पावन संदेश और सरल विवेचन पसंद आया हो, तो वीडियो को लाइक (Like) और शेयर (Share) ज़रूर करें। सनातन धर्म के इस दिव्य ज्ञान से जुड़े रहने के लिए चैनल को सब्सक्राइब (Subscribe) करना न भूलें। ॐ श्री कृष्णार्पणमस्तु 🙏 #Hashtags: #BhagavadGita #GitaGyan #Adhyay14 #Shlok5 #GunatrayaVibhagaYoga #SriKrishna #GeetaUpdesh #DrBKSharma #GitaVivechan #SattvaRajasTamas #SoulBondage #Spirituality #SanatanDharma