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घूँघट के पर्दा पै कान्हा भर पिचकारी मारैगौ।। Ghunghat ke Parda Pai kanha bhar pichakari maraigau.

Mahavir Bhagat ji rasik

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घूँघट के पर्दा पै कान्हा भर पिचकारी मारैगौ।। Ghunghat ke Parda Pai kanha bhar pichakari maraigau.

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Mahavir Bhagat ji rasik
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एक सखी बृज में नई शादी होकर आई, फाल्गुन, होरी का महीना था उसने कृष्ण के बारे में सुना था, वह और सखिओं से कहती है, सखिओ मैं घूँघट में रहूंगी, और कृष्ण मेरे घूंघट के पर्दा पर रंग की पिचकारी मार कर, मुझसे होली खेलेगा। भजन में गोपी के इसी भाव को दर्शाया गया है। आप सभी भजन सुनने वालों को जय श्री कृष्ण जय श्री राधे जय गिरिराज जी की 🙏🙏🙏