पतंग की डोर | नीलम सिन्हा की भावुक प्रेम कहानी | एक अधूरी प्रेम कहानी | Hindi Kahani
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पतंग की डोर” — लेखिका नीलम सिन्हा की एक भावुक और यादों से जुड़ी प्रेम कहानी।
यह कहानी एक ऐसे प्रेम की दास्तान है, जिसकी शुरुआत पतंग के छोटे-से संदेश से होती है और जो समय, परिस्थितियों, परिवार और बिछड़ने के बावजूद यादों में जीवित रहता है। राजनी और रजनीश की यह कहानी पहली मुलाकात, प्रेम, सपनों, विरह, विवाह और वर्षों बाद हुई मुलाकात के भावनात्मक पड़ावों से गुजरती है।
इस वीडियो में कहानी को लेखिका नीलम सिन्हा की रचना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कहानी के साथ 1970 के दशक के बिहार का परिवेश, छतों पर उड़ती पतंगें, पुराने समय की जीवनशैली और प्रेम की स्मृतियों को सिनेमाई दृश्यों के माध्यम से दिखाया गया है।
लेखिका के बारे में:
नीलम सिन्हा की अन्य रचनाओं में “पथ पे पत्थर” (कहानी संग्रह), “धूप-छाँव” (कहानी संग्रह), “शिवानी” (कहानी संग्रह), “सारंग” (कहानी संग्रह), “कहानी भी कविता भी” (कविता संग्रह), “तुम-बिन”, “पूनम”, “इंदिराज”, “दिलराज” (संस्मरण), “भीगते अक्षर” (कहानी संग्रह) और “सूर्योदय से गोधूलि तक का सफर चलते-चलते” है।
पुस्तक के परिचय में उनके संबंध में पुरस्कार, साहित्यिक रुचियों तथा आर.एस.बी. इंटर महाविद्यालय, समस्तीपुर से सेवानिवृत्ति संबंधी जानकारी भी दी गई है।
कहानी: पतंग की डोर
लेखिका: नीलम सिन्हा
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