गरुड़ पुराण सम्पूर्ण सार | मृत्यु, यममार्ग, वैतरणी, यमपुरी और पुष्टि-दृष्टि | गीताप्रेस प्रमाण सहित
Bharat Bhagya Vidhata
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गरुड़ पुराण सम्पूर्ण सार | मृत्यु, यममार्ग, वैतरणी, यमपुरी और पुष्टि-दृष्टि | गीताप्रेस प्रमाण सहित
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गरुड़ महापुराण · सम्पूर्ण सार — मृत्यु, परलोक और पुष्टि-दृष्टि (गीताप्रेस के प्रमाण सहित)
गरुड़ जी ने भगवान से पूछा: "यह मृत्यु क्या है?" — इस प्रश्न के उत्तर से पूरा गरुड़ पुराण बनता है। इस प्रस्तुति में पूरा ग्रन्थ आरम्भ से अन्त तक: गरुड़ जी का वरदान, शिव किसका ध्यान करते हैं, अवतार, रत्नों का जन्म, गया का सबके लिए एक पिण्ड, बृहस्पति का नीतिसार, चार युग और कलियुग का एक महान गुण, "तवास्मि", "कलौ कृतयुगं तस्य", फिर प्रेतकल्प: अन्तिम घड़ी, अँगूठे भर का पुरुष, दान का गुणक, दस पिण्ड से नया शरीर, श्राद्ध कैसे पहुँचता है, छियासी हज़ार योजन का यममार्ग और सोलह पुर, वैतरणी, यमपुरी और यम के दो रूप, नरक (केवल प्रतीक रूप में), कर्मविपाक, प्रेत योनि, गर्भ की यात्रा, शरीर में ब्रह्माण्ड, श्रीकृष्ण का अन्तिम उपदेश "मम / न मम", ब्रह्मकाण्ड — और अन्त में पुष्टि-दृष्टि: श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी और उनके बालकों (श्री गुसाँई जी, श्री गोकुलनाथ जी, श्री हरिराय जी, गो. श्री श्याम मनोहर जी) की दृष्टि से आज का जीव इसे कैसे समझे।
हर दृश्य के कोने में उसका प्रमाण (ग्रन्थ, अध्याय, श्लोक) है। संस्कृत श्लोक केवल गीताप्रेस गोरखपुर की प्रति (और षोडश ग्रन्थ, श्रीवल्लभाचार्य ट्रस्ट मांडवी) से लिये गये हैं।
🎧 संगीत बाइनॉरल है — हेडफ़ोन से सुनें।
अध्याय (Chapters):
0:00 १. यह मृत्यु क्या है?
1:42 २. ग्रन्थ का नक्शा
4:04 ३. गरुड़ जी का वरदान
5:52 ४. शिव किसका ध्यान करते हैं
7:11 ५. सृष्टि और अवतार
8:46 ६. पूजा, मन्त्र और गारुडी विद्या
9:37 ७. भुवनकोश और ज्योतिष
10:23 ८. बलासुर और रत्न
11:46 ९. गया और सबके लिए एक पिण्ड
13:15 १०. रुचि और पितर
14:09 ११. नीतिसार
16:30 १२. एक विश्वकोश
17:39 १३. चार युग
19:37 १४. प्रलय
20:25 १५. भक्त कौन है
22:49 १६. कलौ कृतयुगं तस्य
24:31 १७. गीतासार
25:45 १८. वैकुण्ठ में गरुड़
27:18 १९. अन्तिम घड़ी के लिए
28:59 २०. मृत्यु का क्षण
30:48 २१. दान · राह का पाथेय
32:49 २२. छह पिण्ड, दाह और शोक
36:06 २३. दस पिण्ड से नया शरीर
37:39 २४. श्राद्ध पहुँचता कैसे है
39:41 २५. वृषोत्सर्ग और सपिण्डन
41:29 २६. छियासी हज़ार योजन
43:10 २७. सोलह पुर · पहला भाग
45:31 २८. वैतरणी
47:21 २९. सोलह पुर · दूसरा भाग
49:08 ३०. यमपुरी और धर्मराज
51:26 ३१. नरक
53:16 ३२. कर्मविपाक
55:02 ३३. प्रेत योनि
57:29 ३४. गर्भ की यात्रा
59:16 ३५. शरीर में ब्रह्माण्ड
1:00:39 ३६. मनुष्य जन्म · मोक्ष की सीढ़ी
1:03:28 ३७. श्रीकृष्ण का अन्तिम उपदेश
1:06:24 ३८. ब्रह्मकाण्ड
1:09:31 ३९. नियम और कृपा
1:11:28 ४०. यम स्वयं क्या कहते हैं
1:13:11 ४१. श्री महाप्रभु जी की दृष्टि
1:15:39 ४२. बालकों की दृष्टि
1:18:34 ४३. आज के जीव के लिए
1:21:03 ४४. मृत्यु पर विजय
ध्यान दें:
• गीताप्रेस के अनुसार यह पुराण केवल मृत्यु के बाद सुनने का ग्रन्थ नहीं, पढ़ने और मनन का ग्रन्थ है।
• प्रेतकल्प ४, २६, ३८ में सती (सहगमन) का वर्णन है। वीडियो में इसे छिपाया नहीं गया, उसका अर्थ स्पष्ट किया गया है: ग्रन्थ स्वयं इसे इच्छा पर रखता है, गर्भवती/छोटे बच्चों की माँ को अलग रखता है, प्रेतकल्प ३४ जीवित रहकर पति का उद्धार बताता है, और आत्मघात को दुर्मरण कहता है। आज भारत में सती (निवारण) अधिनियम, १९८७ के अनुसार सती, उसमें सहायता और उसका महिमामण्डन दण्डनीय अपराध हैं। यह अंश इतिहास के एक युग का वर्णन है, आचरण का आदेश नहीं।
• नरकों के दृश्य जान-बूझकर प्रतीकात्मक रखे गये हैं।
• ग्रन्थ के भीतर के पाठ-भेद (दस पिण्डों से अंगों का क्रम, श्रवण बारह या तेरह, पाँच प्रेतों के नाम-कारण) वीडियो में बताये गये हैं।
• ब्रह्मकाण्ड पर गीताप्रेस की टिप्पणी: यह खण्ड केवल वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण में है; संक्षिप्त सार दिया गया है।
• आयुर्वेद के वर्णन अध्ययन के लिए हैं; उपचार केवल योग्य वैद्य/डॉक्टर की सलाह से।
• वार्ताओं के प्रसंग अंग्रेज़ी अनुवाद से हिन्दी में कहे गये हैं (वार्ता-संख्या सहित)।
• अपने कुल की रीति और साधना के विषय में अपने गुरु घर की आज्ञा ही प्रमाण है।
• देवताओं को ज्योति-स्वरूप और प्रतीकों (शंख, चक्र, गदा, पद्म) से दर्शाया गया है। कथा-वाचन: Microsoft Azure की हिंदी आवाज़ (hi-IN-MadhurNeural)।
स्रोत (Sources):
संक्षिप्त गरुडपुराण — गीताप्रेस, गोरखपुर
गरुडपुराण, आचारकाण्ड — अध्याय १, २, ३, ४, ५४, ६८, ८२, ८५, ८९, १०८, १११, ११२, ११३, ११४, ११५, ११६, २०३, २२३, २२४, २२७, २२८, २२९, २३०, २३३, २३७, २३८, २४१
गरुडपुराण, प्रेतकल्प — अध्याय १, २, ३, ४, ५, ६, ७, ९, १०, ११, १२, १३, १४, १५, १६, १७, १८, १९, २२, २४, २६, ३०, ३१, ३२, ३३, ३४, ३६, ३८, ४६, ४७, ४८, ४९
गरुडपुराण, ब्रह्मकाण्ड — अध्याय १, २, ६, १४, १९, २१
श्रीमद्भागवत महापुराण (गीताप्रेस): ६।३।२६–२९, १२।३।५१–५२, १२।१३।४–९
श्रीमद्भगवद्गीता (गीताप्रेस): २।१३, ८।१३ (गरुडपुराण में ही उद्धृत)
अन्त्यकर्म-श्राद्धप्रकाश (गीताप्रेस): गरुडपुराण प्रेतखण्ड ३२।८५–९१ का प्रति-सत्यापन
षोडश ग्रन्थ, श्रीवल्लभाचार्य (श्रीवल्लभाचार्य ट्रस्ट, मांडवी): यमुनाष्टक ६, कृष्णाश्रय १, नवरत्न १ व ९, सिद्धान्तरहस्य १–२ व ८, पुष्टिप्रवाहमर्यादाभेद ३, १७, २०
८४ वैष्णवन की वार्ता (श्री गोकुलनाथ जी; भावप्रकाश श्री हरिराय जी): वार्ता २०, ३२, ७३
२५२ वैष्णवन की वार्ता: वार्ता ६१
वल्लभ वेदान्त, गो. श्री श्याम मनोहर जी (बृहदारण्यक उपनिषद् २।१।२० सहित)
सती (निवारण) अधिनियम, १९८७ — Commission of Sati (Prevention) Act, 1987
पुष्टि-चिन्तन · श्रीकृष्णः शरणं मम