कालीशिला : महाशक्तिपीठ
nimsgarhwali
0:00 / 0:00
कालीशिला : महाशक्तिपीठ
184 просмотра · 2 недели назад
nimsgarhwali
289 подписчиков
184 просмотра · 2 недели назад
कालीशिला — वो रहस्यमयी शिला, जहां मां काली के प्राकट्य की मान्यता है
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की कालीमठ घाटी में एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचना अपने आप में एक अनुभव है। कालीमठ मंदिर से पहाड़ी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए जब आप काली शीला पहुंचते हैं, तो सामने दिखाई देती है एक विशाल शिला—काली शीला।मान्यता है कि यहां मां काली की उत्पत्ति विशाल शिला के रूप में हुई थी,
लेकिन इस शिला की कहानी सिर्फ इतनी नहीं है…
12 वर्ष की कन्या के रूप में मां के प्रकट होने की मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार जब शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों के आतंक से देवता परेशान हुए, तब उन्होंने मां भगवती की आराधना की।
मान्यता है कि मां भगवती काली शीला में 12 वर्ष की कन्या के रूप में प्रकट हुईं। इसके बाद उन्होंने असुरों का संहार किया और उनका स्वरूप काली शक्ति के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इसी कथा के कारण काली शीला को मां काली की शक्ति से जुड़ा अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है।
यह पूरी कथा धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा का हिस्सा है, इसलिए इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं बल्कि आस्था के संदर्भ में समझना चाहिए। यही वजह है कि काली शीला को साधना और शक्ति-उपासना से जुड़ा विशेष स्थान माना जाता है।
रक्तबीज की कथा से भी जुड़ा है यह क्षेत्र कालीमठ और काली शीला के आसपास की लोकपरंपराओं में रक्तबीज की कथा भी सुनाई जाती है। मान्यता है कि मां काली ने रक्तबीज का वध किया था। कालीमठ क्षेत्र में रक्तबीज शिला से जुड़ी एक स्थानीय मान्यता भी प्रचलित है ध्यान रखने वाली बात यह है कि इन कथाओं के अलग-अलग स्थानीय संस्करण मिलते हैं। इसलिए इन्हें लोकविश्वास के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है। यहां पहुंचने के लिए केवल वाहन से मंदिर तक जाना पर्याप्त नहीं—पहाड़ के रास्ते पर पैदल चलना भी यात्रा का हिस्सा है।
यही कारण है कि काली शीला का अनुभव किसी सामान्य सड़क किनारे स्थित मंदिर से बिल्कुल अलग लगता है।
काली शीला की ओर बढ़ते हुए धीरे-धीरे बाजार और सड़क की आवाज पीछे छूटती जाती है।आसपास पहाड़,जंगल,शांत वातावरण,और सामने हिमालयी घाटी ,कई श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा सिर्फ दर्शन तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था के बीच बिताया गया समय भी है।
यहां पहुचनें के लिये सबसे पहले कालीमठ पहुंचना होता है। कालीमठ से जग्गी बगवान 7 किमी गाड़ी से पहुंचा जा सकता है।
इसके बाद जग्गी बगवान से काली शीला तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। कालीशिला मंदिर दूरी लगभग 4 किमी है।
कालीमठ में नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व है और वर्षभर श्रद्धालु यहां आते हैं। हालांकि काली शीला तक पैदल जाने के लिए मौसम साफ होना सबसे महत्वपूर्ण है।
बरसात में पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं और मौसम अचानक बदल सकता है। इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय लोगों या संबंधित प्रशासन से वर्तमान रास्ते और मौसम की स्थिति पता करना बेहतर है।
एक जरूरी बात
काली शीला कोई सामान्य पिकनिक स्पॉट नहीं है।
यह स्थानीय लोगों के लिए आस्था का स्थान है। इसलिए वहां शांति बनाए रखना, धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना और कूड़ा न फैलाना बेहद जरूरी है।
इन सबने मिलकर काली शीला को उत्तराखंड के सबसे रोचक धार्मिक स्थलों में से एक बना दिया है।
और अधिक जानकारी के लिए मेरा यूट्यूब चैनल "'nimsgarhwali"' में वीडीयो देख सकते है।
अब आपकी बारी......
#kalimath #kalisilla #viral #mountains #kedarnath #viralvideo #himalayantrip #trave #uttrakandi #nature #reels l