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बीमार रफ़ी साहब ने आखिरी गीत में ऐसा जादू किया कि उषा खन्ना की आँखें भर आईं!

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बीमार रफ़ी साहब ने आखिरी गीत में ऐसा जादू किया कि उषा खन्ना की आँखें भर आईं!

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YouTube Description क्या आप जानते हैं कि रफ़ी साहब की सेहत ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने “तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है” जैसा अमर गीत कैसे गाया? और रिकॉर्डिंग के बाद उन्होंने उषा खन्ना के सिर पर हाथ रखकर क्या कहा, जिससे उषा खन्ना की आँखें भर आईं? यह किस्सा 1980 की फिल्म आप तो ऐसे ना थे के गीत “तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है” का है। इस गीत को निदा फ़ाज़ली ने लिखा और संगीत उषा खन्ना ने दिया था। इसे मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया और यह राज बब्बर और रंजीता पर फिल्माया गया। उस दिन रफ़ी साहब की सेहत ठीक नहीं थी। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन उन्होंने बाहर से कोई कमी नहीं आने दी। वे समय से स्टूडियो पहुँचे और बिना कोई शिकायत किए गीत की रिहर्सल शुरू कर दी। उनका मूड शांत और मुस्कुराता हुआ था, लेकिन उनकी आवाज़ में एक अलग ही गहराई थी। उषा खन्ना ने बताया कि जब रफ़ी साहब ने पहली बार गीत गाया, तो उन्हें लगा जैसे वे किसी और दुनिया में चले गए हों। उनकी आवाज़ में इतनी मिठास, दर्द और रोमांटिक भावना थी कि स्टूडियो में मौजूद सभी लोग चुप हो गए। रफ़ी साहब ने इस गीत को इतनी लगन से गाया कि उनकी आवाज़ में दर्द, प्यार और तड़प सब कुछ महसूस होता था। उन्होंने गीत को सिर्फ सुर में नहीं, बल्कि भावना में भी पकड़ा। उनका मकसद था कि गीत सुनने वाले को लगे कि यह किसी असली प्रेमी की आवाज़ है। उषा खन्ना ने कहा कि रफ़ी साहब की आवाज़ में वह जादू था जो किसी और में नहीं था। उन्होंने इस गीत को इतनी सच्चाई से गाया कि गीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। गीत खत्म होने के बाद रफ़ी साहब ने उषा खन्ना के सिर पर हाथ रखा और कहा, “खुदा तुम्हें अच्छा रखे।” उषा खन्ना ने कहा कि इससे बड़ी शाबाशी और इनाम उनके लिए कुछ नहीं हो सकता था। यह पल उनके लिए सबसे यादगार बन गया। उषा खन्ना ने बताया कि रफ़ी साहब का यह प्यार और सम्मान उनके लिए बहुत खास था। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा इनाम उनके लिए कुछ नहीं हो सकता था। यह गीत रफ़ी साहब और उषा खन्ना के बीच का आखिरी गीत था। इसके कुछ समय बाद ही रफ़ी साहब का देहांत हो गया। इसीलिए यह गीत उषा खन्ना के लिए सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि रफ़ी साहब की याद का एक जीवित नमूना बन गया। उषा खन्ना ने बताया कि जब वे इस गीत को सुनती हैं, तो उन्हें रफ़ी साहब की आवाज़ और उनका वह प्यार भरा व्यवहार याद आता है। यह गीत उनके लिए एक अमूल्य याद बन गया। गीत रिलीज़ होते ही लोगों को बहुत पसंद आया। इसके तीन वर्जन बने—रफ़ी साहब, मनहर उधास और हेमलता की आवाज़ में। लेकिन रफ़ी साहब का वर्जन सबसे ज्यादा पसंद किया गया, क्योंकि उनकी आवाज़ में वह जादू था जो किसी और में नहीं था। यह गीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। रफ़ी साहब की आवाज़ और उषा खन्ना की धुन ने मिलकर इसे अमर बना दिया। यह गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि दो कलाकारों के बीच के प्यार और सम्मान का प्रतीक भी है। वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, शेयर करें और ऐसे ही पुराने बॉलीवुड के सच्चे किस्सों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। कमेंट में बताइए—आपका पसंदीदा मोहम्मद रफ़ी गाना कौन-सा है? #MohammedRafi #RafiSahab #UshaKhanna #RafiUshaKhanna #AapToAiseNaThe #TuIsTarahSeMeriZindagiMein #NidaFazli #BollywoodStories #BollywoodHistory #MusicHistory #OldBollywood #ClassicBollywood #HindiCinema #PlaybackSinger #RafiSongs