Shivananda Lahari | Verse 6 | शुष्क तर्क या शिव भक्ति? | Adi Shankaracharya | Wuppuluri Studios
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Shivananda Lahari | Verse 6 | शुष्क तर्क या शिव भक्ति? | Adi Shankaracharya | Wuppuluri Studios
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घटो वा मृत्पिण्डोऽप्यणुरपि च धूमोऽग्निरचलः ।
पटो वा तन्तुर्वा परिहरति किं घोरशमनम् ।
वृथा कण्ठक्षोभं वहसि तरसा तर्कवचसा ।
पदाम्भोजं शम्भोर्भज परमसौख्यं व्रज सुधीः ॥
आदि शंकराचार्य विरचित 'शिवानन्दलहरी' के इस छठे श्लोक में मानव मन को व्यर्थ के शुष्क तर्क-वितर्क (घड़ा, मिट्टी, परमाणु, अग्नि, वस्त्र, धागा) से हटाकर भगवान शिव के चरण-कमलों में शरण लेने का उपदेश दिया गया है। जब तक अधिष्ठान ब्रह्म का बोध न हो, केवल बौद्धिक बहस से मृत्यु का भय और संसार का संताप नहीं मिट सकता।
✨ भक्ति और आत्म-शांति का दिव्य अनुभव करें।
Produced by: Wuppuluri Studios
Channel: @wsrinivasrao4951
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