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World's First Shri Ram Raksha Strotra. II विश्व का प्रथम रामरक्षा स्तोत्र II

Dr. Raj Miniyar, USA

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World's First Shri Ram Raksha Strotra. II विश्व का प्रथम रामरक्षा स्तोत्र II

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Dr. Raj Miniyar, USA
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II विश्व का प्रथम रामरक्षा स्तोत्र II रामरक्षा स्तोत्र अनादि काल से, सहस्रों-सहस्र वर्षों से गाया, जपा और पूजित किया जाता रहा है। सृष्टि के आरंभ से ही इसकी दिव्य धारा प्रवाहित होती रही है। परंतु यह संभवतः प्रथम अवसर है जब इसे एक अत्यंत भिन्न, अद्वितीय रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस दिव्य स्तोत्र के रचयिता स्वयं भगवान महादेव हैं, और इसका उल्लेख इस स्तोत्र के अंत भाग में प्राप्त होता है।भगवान महादेव स्वप्न में बुधकौशिक ऋषि के समक्ष प्रकट हुए और उन्होंने यह स्तोत्र बुधकौशिक ऋषि को प्रदान किया।जब बुधकौशिक ऋषि प्रातःकाल, उषा बेला में जागृत हुए, तब उन्होंने इसे यथावत लिख लिया। अतः इस स्तोत्र के लेखक एवं रचनाकार स्वयं भगवान महादेव ही हैं। भगवान श्री राम के दिव्य अमृतमय माधुर्य का इस रामरक्षा के स्वरूप में पूर्ण आस्वादन करने का सर्वोत्तम उपाय यह है कि आप निम्नलिखित निर्देशों का अनुसरण करें। आपको केवल सुनना नहीं है…आपको इसे अनुभव करना है… आपको इसे अपने अंतःकरण में उतारना है। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अपनी आँखें धीरे से बंद करें…और संसार की समस्त ध्वनियों को पूर्ण शांति में लीन होने दें। कल्पना करें — उषाकाल की प्रथम प्रभा में एक विशाल, पवित्र सरोवर। आकाश गहन नील और कोमल सुवर्ण आभा से अलंकृत है। वायु शीतल है… निर्मल है… काल से परे है। उस स्थिर जल के मध्य… एक नील कमल विराजित है। गंभीर… शांत… अनंत। जैसे ही सूर्य धीरे-धीरे उदित होने लगता है, उसकी प्रथम सुवर्ण किरणें सरोवर को स्पर्श करती हैं। और उसी स्पर्श के साथ… नील कमल जाग्रत होने लगता है। एक पंखुड़ी… धीरे से प्रस्फुटित होती है। फिर दूसरी… फिर तीसरी… प्रत्येक पंखुड़ी ऐसे प्रस्फुटित होती है —मानो कोई मंत्र सजीव हो रहा हो, मानो भक्ति साकार हो रही हो, मानो युगों-युगों की श्रद्धा पुनः प्राण धारण कर रही हो। एक मंद समीर सरोवर के ऊपर प्रवाहित होने लगता है। प्रथम अत्यंत कोमल… मानो सूक्ष्म स्पंदन। फिर प्रवाहित… फिर तीव्र… फिर पुनः शांत। प्रत्येक वायु-तरंग के साथ, कमल की पंखुड़ियाँ संचलित होती हैं — कभी ऊपर उठती हैं, कभी नम्रता से झुकती हैं, कभी नृत्य करती हैं, कभी पूर्ण स्थिरता में स्थित हो जाती हैं। इसी प्रकार यह रामरक्षा स्तोत्र प्रकट होता है।