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सामायिक के भावों के साथ प्रतिक्रमण | Jain Samayik Pratikraman | Arham Shri

Arham Dhyan Yog

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सामायिक के भावों के साथ प्रतिक्रमण | Jain Samayik Pratikraman | Arham Shri

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Arham Dhyan Yog
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ध्यान के भाव में कीर्तन - एक अद्भुत अहसास | सामायिक के भावों के साथ प्रतिक्रमण | Jain Samayik Pratikraman | Arham Shri Pranamya Sagar Ji Maharaj | अर्हं श्री प्रणम्य सागर जी महाराज | Pratikraman "हम तो कबहूँ न निज घर आये। पर घर फिरत बहुत दिन बीते नाम अनेक धराये। हम तो कबहुँ न निज घर आये ।।" पर पद निजपद मानि मगन है, परपरनति लपटाये । शुद्ध बुद्ध सुखकन्द मनोहर, चेतनभाव न भाये। हम तो कबहुँ न निज घर आये ॥ नर, पशु, देव, नरक निज जान्यौ, परजय बुद्धि लहाये। अमल, अखण्ड, अतुल, अविनाशी आतमगुन नहिं गाये। हम तो कबहुँ न निज घर आये ॥ यह बहु भूल भई हमरी फिर, कहा काज पछताये । 'दौल' तजौ अजहूँ विषयन को, सतगुरु वचन सुहाये॥ हम तो कबहुँ न निज घर आये ॥ FOR MORE UPDATES: Subscribe to our YouTube Channel:    / arhamdhyanyog   Official Facebook Page:   / yoga.arham   Official Instagram Page:   / arhamdhyanyog   Official App in Playstore: Arham Yoga #samayikpath #samayikvidhi #Pratikraman #ArhamShri #ArhamDhyanYog